बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होने को लेकर बड़ा बयान दिया. बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने गुरुवार (10 सितंबर 2026) को कहा कि तारिक रहमान को दो दिवसीय ब्रिक्स समिट में आमंत्रित नहीं किया गया. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि बांग्लादेश इस समिट में अपना एक प्रतिनिधि भेजेगा. उन्होंने तारिक रहमान के भारत दौरे से साफ इनकार कर दिया.
बांग्लादेश बोला ब्रिक्स के लिए नहीं मिला निमंत्रण
द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री तारिक रहमान ब्रिक्स समिट के लिए भारत जाएंगें? इसके जवाब में हुमायूं कबीर ने कहा, ‘हम वहां कैसे जाएं? क्या बांग्लादेश सरकार से किसी को आमंत्रित किया गया है? उन्होंने कहा कि निमंत्रण बांग्लादेश के पीएम को नहीं, बल्कि बिम्सटेक (BIMSTEC) के अध्यक्ष को भेजा गया था. हमारे प्रधानमंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया.’ BIMSTEC बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसका पूरा नाम बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन है. यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को आपस में जोड़ता है.
12 सितंबर से भारत कर रहा ब्रिक्स की मेजबानी
भारत 12 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. ब्रिक्स आज प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीतियों के समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है. यह ऐसा मंच है जहां सदस्य देश वैश्विक शासन, विकास, व्यापार और आर्थिक सुधारों जैसे मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करते हैं. लगातार संवाद और सहयोग के जरिए ब्रिक्स ने ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
दुनिया में बढ़ा ब्रिक्स का प्रभाव
ब्रिक्स के विस्तार का एक महत्वपूर्ण चरण जनवरी 2024 में शुरू हुआ था, जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई पूर्ण सदस्य बने. इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया संगठन का 11वां पूर्ण सदस्य बना. इन नए सदस्यों के शामिल होने से ब्रिक्स का प्रभाव एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक और व्यापक हो गया है. साल 2025 के दौरान बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इस ढांचे से जुड़े, जिससे ब्रिक्स की पहुंच और वैश्विक प्रभाव क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई.
