भारत में रोड एक्सीडेंट बहुत आम बात है क्योंकि, हमारे देश में हजारों गाड़ियों का एक्सीडेंट हर दिन होता है. जिसके बाद लोग इंश्योरेंस कंपनियों के चक्कर लगाते हैं और क्लेम लेने के लिए हर प्रयास करते हैं. लेकिन रोड एक्सीडेंट में ऐसा माना जाता है कि, इंश्योरेंस क्लेम तभी मिलता है जब हादसा ड्राइवर की लापरवाही या तेज गति की वजह से हुआ हो.
लेकिन अगर अचानक गाड़ी का ब्रेक फेल हो जाए और कोई बड़ा हादसा हो जाए तो क्या ऐसी स्थिति में पीड़ित या उसके परिवार को बीमा कंपनी से मुआवजा मिलेगा यह सवाल हर किसी के दिमाग में रहता है. इस बीच सिक्किम हाईकोर्ट ने ऐसे ही मामले पर एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. जिसके बाद हर तरफ इसकी चर्चा चल रही है.
नो-फॉल्ट लायबिलिटी का नियम
बता दें कि, अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भले ही चालक की लापरवाही साबित न हो फिर भी मोटर वाहन अधिनियम की धारा 140 के तहत नो-फॉल्ट लायबिलिटी के आधार पर मुआवजा दिया जा सकता है.
ब्रेक फेल होना एक यांत्रिक विफलता है जिसे चालक की जानबूझकर की गई गलती नहीं माना जा सकता. ऐसी परिस्थिति में बीमा कंपनी वाहन मालिक की देनदारी की भरपाई करने की अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती और उसे पीड़ित परिवार को तय मुआवजा देना ही होगा.
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बीमा पॉलिसियों की पर कोर्ट ने क्या कहा?
बता दें कि, मामले की सुनवाई के दौरान सिक्किम हाईकोर्ट के जस्टिस भास्कर राज प्रधान ने इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा जारी किए जाने वाले सर्टिफिकेट्स की अस्पष्ट भाषा पर गहरी चिंता व्यक्त की है. कोर्ट ने कहा कि बीमा कंपनियों को पॉलिसी के नियम और शर्तों को इतना सरल और स्पष्ट बनाना चाहिए कि कोई भी ग्राहक उसे आसानी से समझ सके.
ग्राहकों को अपने अधिकारों और बीमा कवरेज की सीमा जानने के लिए कंपनियों की वेबसाइटों के दर्जनों पन्नों की भूलभुलैया में नहीं भटकना पड़ना चाहिए. कुल मिलाकर कोर्ट ने बीमा कंपनियों के नियमों को लेकर फटकार लगाई है.

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क्या कहता है IRDAI का नियम?
वहीं, बात करें अगर भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के दिशानिर्देशों के नियमों के अनुसार तो प्रत्येक इंश्योरेंस पॉलिसी और सर्टिफिकेट में कवरेज की स्पष्ट सीमा दर्ज होनी चाहिए.
अगर वाहन के पास वैध कंप्रीहेंसिव या थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस है तो किसी भी अनहोनी या टेक्निकल खराबी के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी को करनी होती है. वाहन मालिक का यह कानूनी अधिकार है कि उसके पास मौजूद वैलिड पैकेज पॉलिसी के तहत मिलने वाली क्लेम राशि उसे बिना किसी दिक्कत के मिल सके.
क्लेम पाने के लिए क्या करें?
जानकारी के लिए बता दें कि, अगर कभी ब्रेक फेल होने या किसी टेक्निकल खराबी से एक्सीडेंट हो जाता है तो क्लेम प्रक्रिया के लिए कुछ जरूरी बातें ध्यान में रखनी चाहिए. हादसे के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराएं और पुलिस पंचनामा बनवाएं.
जिसमें हादसे की वजह का जिक्र हो और इसके बाद तुरंत अपनी बीमा कंपनी को हादसे की सूचना दें और कार की मैकेनिकल जांच रिपोर्ट हासिल करें. ये दस्तावेज ट्रिब्यूनल या इंश्योरेंस कंपनी के सामने क्लेम साबित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
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