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कहीं गौरी पूजन तो कहीं माटोली, भारत के इन राज्यों में ऐसे मनाते हैं गणेश चतुर्थी


गणेश उत्सव खासतौर पर महाराष्ट्र में धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन गोवा में गणेश चतुर्थी को चवथ कहा जाता है. यहां त्योहार का केंद्र परिवार होता है. घर में गणपति की स्थापना के साथ ‘माटोली’ सजाने की अनोखी परंपरा है, जिसमें फल, सब्जियां, पत्तियां और जंगल से मिलने वाली प्राकृतिक चीजों से सजावट की जाती है. मोदक के साथ स्थानीय व्यंजन भी बनाए जाते हैं.

तमिलनाडु में भगवान गणेश को पिल्लैयार नाम से भी पूजा जाता है. यहां घरों और मंदिरों में पूजा के साथ कोझुकट्टई (मोदक) का विशेष महत्व है.

तमिलनाडु में भगवान गणेश को पिल्लैयार नाम से भी पूजा जाता है. यहां घरों और मंदिरों में पूजा के साथ कोझुकट्टई (मोदक) का विशेष महत्व है.

बिहार के मिथिला क्षेत्र में गणेश चतुर्थी पर चौरचन पर्व मनाते हैं. इसमें महिलाएं संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए व्रत रखती हैं. शाम को आंगन में अरिपन बनाया जाता है और चंद्रमा की पूजा की जाती है. चंद्रमा को फल, पकवान और अन्य नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं. इस पूजा में चंद्र दर्शन के साथ गणेश जी की आराधना का भी महत्व माना जाता है.

बिहार के मिथिला क्षेत्र में गणेश चतुर्थी पर चौरचन पर्व मनाते हैं. इसमें महिलाएं संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए व्रत रखती हैं. शाम को आंगन में अरिपन बनाया जाता है और चंद्रमा की पूजा की जाती है. चंद्रमा को फल, पकवान और अन्य नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं. इस पूजा में चंद्र दर्शन के साथ गणेश जी की आराधना का भी महत्व माना जाता है.

मध्यप्रदेश में गणेश उत्सव बहुत खास होता है. यहां विशाल पंडाल से लेकर तमाम चौराहों पर गणेश स्थापना की जाती है, साथ ही मनोरंजन के लिए चलित झांकी भी बनाई जाती है.

मध्यप्रदेश में गणेश उत्सव बहुत खास होता है. यहां विशाल पंडाल से लेकर तमाम चौराहों पर गणेश स्थापना की जाती है, साथ ही मनोरंजन के लिए चलित झांकी भी बनाई जाती है.

आंध्र प्रदेश में गणेश चतुर्थी को विनायक चविथि कहा जाता है. यहां भगवान विनायक की स्थापना के साथ विशेष पूजा और पत्तों से जुड़े पूजन-विधान देखने को मिलते हैं. कनिपकम विनायक मंदिर में इस अवसर पर कई दिनों तक विशेष उत्सव और वाहन सेवा की परंपरा है.

आंध्र प्रदेश में गणेश चतुर्थी को विनायक चविथि कहा जाता है. यहां भगवान विनायक की स्थापना के साथ विशेष पूजा और पत्तों से जुड़े पूजन-विधान देखने को मिलते हैं. कनिपकम विनायक मंदिर में इस अवसर पर कई दिनों तक विशेष उत्सव और वाहन सेवा की परंपरा है.

Published at : 11 Sep 2026 05:30 AM (IST)

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