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गोंडा पहुंचे संजय निषाद का गुलदस्ते, गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत, सपा बोली- KGMU में तो बेइज्जती हुई


उत्तर प्रदेश स्थित गोंडा में विनोद साहनी की हत्या के बाद सियासत तेज हो गई है. इस बीच निषाद पार्टी के मुखिया और योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद भी जिला मुख्यालय पहुंचे और अफसरों को डांट लगाई.  सर्किट हाउस पहुंचे निषाद के लिए जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन और पुलिस अधीक्षक अभिषेक गुलदस्ता लेकर पहुंचे.

निषाद ने न सिर्फ अधिकरियों से गुलदस्ता लिया बल्कि बाकायदा गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी भी ली. उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस सरकार की बदनामी करा रही है.

अधिकारियों से गुलदस्ता लेते हुए निषाद ने कहा कि विपक्ष लाशों पर राजनीति कर रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो पर समाजवादी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि  कल जैसे ही अखिलेश यादव को पता चला कि विनोद साहनी की इलाज के दौरान मौत हो गई है, उन्होंने मुझे और राजपाल कश्यप को मौके पर भेजा. वहां संजय निषाद बैठे हुए नजर आए. उन्हें कोई सिपाही नहीं पूछ रहा था, कोई डॉक्टर उनकी बात सुनने के लिए तैयार नहीं था. कैबिनेट मंत्री की ऐसी स्थिति देखकर हमें भी दया आ रही थी. इसके बाद हम लोग धरने पर बैठे और फिर संजय निषाद भी धरने पर बैठ गए.

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एक वीडियो प्रशासन द्वारा छिपाया जा रहा था, जिसमें साहनी ने आरोपियों के नाम लिए थे. मंत्री की अपनी ही सरकार में जब उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तब समाजवादी पार्टी को धरना-प्रदर्शन करना पड़ रहा है. इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू होती है. निषाद पर हमलावर हसन ने कहा कि सत्ता की मलाई खानी है, लेकिन समाज के लोगों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ खड़ा नहीं होना है.

गोंडा के वीडियो का जिक्र करते हुए हसन ने कहा कि वहां संजय निषाद को सम्मान मिल रहा था, लेकिन लखनऊ में उनकी बेइज्जती हुई. एक चौकी इंचार्ज उनकी बात सुनने को तैयार नहीं था और डॉक्टर भी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं था. 

सरकार की बदनामी के मुद्दे पर क्या बोली सपा?

संजय निषाद द्वारा एसपी से यह कहे जाने पर कि सरकार की बदनामी हो रही है, हसन ने कहा कि इससे सरकार की क्या बदनामी हो रही है, यह सभी देख रहे हैं. सरकार की नीति ही अन्याय की है. मुकदमा तक नहीं लिखा गया और बहुत कोशिशों के बाद मुकदमा दर्ज हुआ. हत्या हो जाने के बाद ही कार्रवाई होती है.

हसन ने कहा कि सत्ता पक्ष से जुड़े विधायक हैं, संजय निषाद मंत्री हैं, इसलिए उन्हें अपने समाज के व्यक्ति के लिए खड़ा होना चाहिए. जिस सत्ता में उनकी ही सुनवाई नहीं हो रही है और कार्रवाई के लिए धरने पर बैठना पड़ रहा है, वहां उन्हें अपनी स्थिति पर विचार करना चाहिए. अगर आप सच में पिछड़ों की बात करते हैं तो आपको शर्म आनी चाहिए. आपको सरकार से समर्थन वापस लेना चाहिए और इस्तीफा दे देना चाहिए. अगर आप अपने समाज के लोगों के लिए खड़े नहीं हो सकते तो फिर पद पर बने रहने का क्या मतलब है?

उन्होंने कहा कि अगर संजय निषाद वास्तव में पिछड़ों और अपने समाज के हित की बात करते हैं, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए.

संजय निषाद ने क्या कहा था?

दरअसल, साहनी मामले को लेकर निषाद जब गोंडा सर्किट हाउस पहुंचे तो उन्होंने वहां डीएम और एसपी से कहा कि इतनी फोर्स यहां लगा दी है. ऐसा लगता है कि हमारे सारे लोग गुंडे, कत्ली थे. मैंने कहा था कि मेरे लोग शांति से ज्ञापन देंगे, अपनी बात रखेंगे. उन्होंने कहा कि आप लोग विपक्षियों को अवसर दे रहे हैं. तीन महीने पहले मैंने लेटर लिखा था. जब साहनी की बात नहीं सुनी गई तो वो नाराज होकर दूसरी पार्टी में चला गए. 

निषाद ने कहा कि जहां फोर्स लगानी है,  वहां नहीं लगा रहे हैं. ताकि आगजनी न हो, कोई दूसरी घटना न हो. ये तो गलत है न. अधिकारियों को टाइट करिए, ये गलत सूचना दे रहे हैं. एलआईयू वगैरह को हटा दें, ये गलत सूचना दे रहे हैं. 



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