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मायावती के बाद किसके हाथ में बसपा की कमान? इस नाम की चर्चा के बीच उठे सवाल


बहुजन समाज पार्टी में मायावती के बाद पार्टी की कमान किसके हाथ होगी? 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ये सवाल एक बार फिर चर्चा में है. मायावती के भतीजे आकाश आनंद को लेकर पार्टी में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. मायावती ने आकाश से दूरी के बाद दूसरे भतीजे ईशान को भी पार्टी में कोई पद नहीं देने की बात कही है. 

इस बीच मायावती की भतीजी दीपिका आनंद के नाम की चर्चा ने BSP की सियासत और मायावती की राजनीतिक विरासत पर नई बहस छेड़ दी है. वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला ने बताया कि मायावती परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ रही हैं, लेकिन उनके भाई आनंद कुमार और भतीजे आकाश आनंद को पार्टी में अहम जिम्मेदारियां मिलती रही हैं. 

आकाश आनंद को एक समय मायावती के उत्तराधिकारी के तौर पर भी आगे बढ़ाया गया था. हालांकि, बाद में पार्टी के भीतर समीकरण बदले और आकाश को पार्टी से दूर किया गया, जिसके बाद उनकी वापसी भी हुई.

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आकाश आनंद से नाराजगी की चर्चा

आकाश आनंद की शादी के बाद परिवार और पार्टी के अंदर समीकरणों में बदलाव की भी चर्चा होती रही है. उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी बसपा की अंदरूनी सियासत में अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं.

ज्ञानेंद्र शुक्ला का कहना है कि मौजूदा समय में मायावती अपने दोनों भतीजों से नाराज और असहज नजर आ रही हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या मायावती अब परिवार के किसी दूसरे सदस्य को राजनीतिक भूमिका देने पर विचार कर रही हैं?

दीपिका आनंद की एंट्री पर चर्चा क्यों?

मायावती की भतीजी दीपिका आनंद का नाम इन दिनों चर्चा में है. दीपिका वकालत की पढ़ाई कर रही हैं. अगर उन्हें आने वाले समय में बसपा में कोई बड़ी भूमिका मिलती है तो इसे महिलाओं और युवा वर्ग को जोड़ने की रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है. हालांकि, अभी तक मायावती की तरफ से दीपिका को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी देने या उन्हें उत्तराधिकारी बनाने को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है.

मायावती को महिला चेहरे की जरूरत नहीं

वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरोन का मानना है कि मायावती खुद देश की बड़ी महिला और दलित नेता हैं. इसलिए बसपा को किसी दूसरे महिला चेहरे की जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक, असली सवाल महिला चेहरे का नहीं बल्कि मायावती के उत्तराधिकारी का है.

सुनीता एरोन के अनुसार मौजूदा स्थिति में ऐसा लगता है कि मायावती अपने आसपास के लोगों पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रही हैं. यहां तक कि आकाश आनंद को लेकर भी भरोसे का संकट दिखाई देता है. ऐसे में मायावती परिवार से बाहर किसी वरिष्ठ नेता को भी आगे कर सकती हैं. बसपा की राजनीति लंबे समय से मायावती के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है. ऐसे में उनके बाद पार्टी की कमान कौन संभालेगा, यह 2027 से पहले बड़ा राजनीतिक सवाल बन गया है.

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