जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार (15 सितंबर) को अपनी पार्टी के अंदर अस्थिरता की अटकलों और मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है और ये अफवाहें J&K में खुफिया एजेंसियों के इशारे पर फैलाई जा रही हैं.
उमर अब्दुल्ला कुछ राजनेताओं, राजनीतिक विश्लेषकों और पत्रकारों की उन रिपोर्टों और अटकलों का जवाब दे रहे थे, जिनमें दावा किया गया था कि NC में फूट पड़ने वाली है और सरकार गिर जाएगी. उन्होंने कहा कि उन्हें अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है और उन्हें किसी के भी पार्टी छोड़ने का डर नहीं है. साथ ही, उन्होंने बिना नाम लिए उन आलोचकों पर तीखा हमला किया, जिन पर उन्होंने गुपकर रोड पर स्थित एजेंसियों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया.
‘मुझे अपने लोगों पर पूरा भरोसा है’
SKICC में एक कार्यक्रम के दौरान पूछे जाने पर कि क्या उन्हें डर है कि उनके कुछ विधायकों को तोड़ा जा सकता है, तो इस पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ‘मैं रोज अपने विधायकों की गिनती करता हूं या नहीं? आप यही पूछ रहे हैं? तो मुझे बिल्कुल भी डर नहीं है. मुझे अपने लोगों पर पूरा भरोसा है.’
मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि वह उन लोगों को जानते हैं जो उनकी सरकार की स्थिरता के बारे में अटकलें फैला रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये कुछ ऐसे लोग हैं जो गुपकर रोड पर एजेंसियों के दफ्तरों (जहां इंटेलिजेंस ब्यूरो और मिलिट्री इंटेलिजेंस के मुख्यालय हैं) से लिफाफे लेते हैं और सरकार बनने के तुरंत बाद उनसे ‘एडजस्टमेंट’ (समायोजन) के लिए संपर्क किया था.
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‘ये लोग जो बीच में हैं, मैं जानता हूं कि वे कौन हैं’
उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘ये लोग जो बीच में हैं, मैं जानता हूं कि वे कौन हैं. ये कुछ ऐसे लोग हैं जो गुपकर रोड पर एजेंसियों के दफ्तरों से अपने लिफाफे लेते हैं. ‘उमर ने दावा किया कि जो लोग उनकी सरकार के गिरने की अफवाहों के पीछे हैं, वे वही लोग हैं जो सरकार बनते ही उनके दफ्तर में अपनी सरकार में जगह पाने की उम्मीद लेकर आए थे. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जो लोग अब विधायकों की गिनती कर रहे हैं, वे वही लोग हैं जिन्हें उन्होंने अपनी सरकार में शामिल करने से मना कर दिया था.
‘अब, उनकी इज्जत बनाए रखने के लिए, मैं मुंह नहीं खोलता. लेकिन आप रिमोट हटाएं, तो बताऊं की वे मेरे दफ्तर आते हैं. आपको उन सभी लोगों के नाम मिल जाएंगे, जो आज विधायकों की गिनती कर रहे हैं.’ क्योंकि मैंने उन्हें नौकरी नहीं दी.
सरकारी आवास न मिलने पर सोशल मीडिया का कर रहे इस्तेमाल
अपनी सरकार की आलोचना करने वालों पर निशाना साधते हुए, मुख्यमंत्री ने उनके विरोध को निजी स्वार्थ से जोड़ा. उन्होंने कहा कि सरकारी आवास न मिलने के कारण वे सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने लगे.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, ‘ये वे कमेंटेटर हैं जिन्हें सरकारी घर नहीं मिला, इसलिए वे सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं. अगर मैंने उन्हें जवाहर नगर में फ्लैट दिया होता, तो क्या वे इस तरह लिखने की हिम्मत करते? यह स्वार्थ है, है ना? और मुझे इस स्वार्थ की कोई चिंता नहीं है.’
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