दिल्ली हाईकोर्ट ने ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जौहल उर्फ जग्गी को UAPA से जुड़े मामलों में जमानत दे दी है. जौहल पर पंजाब के लुधियाना और जालंधर जिलों में हुई कई टारगेट किलिंग से जुड़े मामले दर्ज हैं. जांच एजेंसी का आरोप रहा है कि ये हत्याएं खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) की कथित साजिश का हिस्सा थीं.
जगतार सिंह जौहल को साल 2016 में गिरफ्तार किया गया था. उसके खिलाफ पंजाब में हुई टारगेट किलिंग से जुड़े कुल 8 मामले दर्ज किए गए थे. जांच एजेंसी के मुताबिक, इन मामलों में RSS और हिंदू संगठनों से जुड़े प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया गया था.
आरोपों के मुताबिक, इन वारदातों को अंजाम देने वाले शूटर्स के तौर पर हरदीप सिंह और रामांदीप सिंह के नाम सामने आए थे. वहीं, जौहल पर KLF के लिए फाइनेंसर और कूरियर की भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था.
3,000 पाउंड की रकम पहुंचाने का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप था कि जगतार सिंह जौहल ने ब्रिटेन से भेजी गई करीब 3,000 पाउंड की रकम को आगे पहुंचाने में भूमिका निभाई. आरोप के मुताबिक, यह रकम पेरिस में मौजूद एक ऑपरेटिव के जरिए शूटर तक पहुंचाई गई थी. हालांकि, इन आरोपों पर अदालत में सुनवाई के दौरान कानूनी प्रक्रिया जारी रही.
जौहल की जमानत याचिकाएं पहले निचली अदालत में भी खारिज हो चुकी थीं. पांच मामलों में सितंबर 2022 और दो मामलों में अप्रैल 2024 में जमानत से जुड़े आदेश दिए गए थे. इसके बाद 18 सितंबर 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उसकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं.
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मिली राहत
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 15 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मामलों को नए सिरे से विचार के लिए दिल्ली हाईकोर्ट भेजा था. अब इसी प्रक्रिया के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने जगतार सिंह जौहल को जमानत दे दी है.
जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि अदालत ने मामले में लगे आरोपों को सही या गलत ठहरा दिया है; मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी.
