आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी चीफ एन. चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान के बाद कहा कि अब एसआईर से जुड़ी गलतफहमियां दूर हो गई है. एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने लिखा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों एस. एस. संधू-विवेक जोशी के नेतृत्व में सर्वसम्मति से जारी किए गए स्पष्टीकरण ने हमारी संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को फिर से साबित किया है और इससे जुड़ी सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है.
सीएम चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले संस्थागत नियमों का सख्ती से पालन करते हुए सामूहिक रूप से लिए जाते हैं. उन्होंने कहा, ‘छोटे-मोटे राजनीतिक फायदों के लिए भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और चुनावी प्रक्रिया पर दुनिया के भरोसे को ठेस पहुंचाने की कोशिशें बेहद दुखद हैं. चुनाव के नतीजे जनता का जनादेश होते हैं और एक मजबूत लोकतंत्र में नेताओं को जीत और हार दोनों को नम्रता व सम्मान के साथ स्वीकार करना चाहिए.’
‘संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान सर्वोपरि’
उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान सर्वोपरि है और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की जिम्मेदारी है. भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने SIR और फॉर्म-6 को लेकर हालिया विवादों और आंतरिक असहमति की खबरों पर स्पष्टीकरण जारी किया. आंतरिक मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए ECI ने स्पष्ट किया कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले पूर्ण आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए थे. आयोग के अनुसार, फॉर्म-6 में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि एसआईआर के तहत इसके साथ केवल एक अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़ा गया है.
चुनाव आयोग ने बयान जारी किया
चुनाव आयोग ने ने एसआईआर के दौरान नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए कई अहम फैसले लिए हैं. ECI की शनिवार (26 सितंबर) को हुई बैठक में तय किया गया कि अनमैप्ड और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामलों में नोटिस पाने वाले लोगों को सुनवाई के लिए ईआरओ/एईआरओ कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी.
बैठक में लिए गए फैसलों के अनुसार, ऐसे लोगों के घर जाकर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे. इसके बाद संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) दस्तावेजों के आधार पर फैसला करेंगे. आयोग ने कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में, ईआरओ के निर्णय के अनुसार, सुनवाई आयोजित की जाएगी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराया जाएगा. यदि सुनवाई की आवश्यकता पड़ती है तो मतदाता अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से अधिकृत कर सकता है.
आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को और मजबूत करने का भी फैसला किया है. जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिया गया है कि वे जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क स्थापित करें या विशेष शिविर आयोजित करें. इन सुविधाओं का लाभ रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों, बेघर लोगों और अन्य जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया जाएगा.
स्वत: संज्ञान ले सुप्रीम कोर्ट: कांग्रेस
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले का तत्काल स्वत: संज्ञान लेना चाहिए और सीईसी ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराना चाहिए. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने अधिकारियों को युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर आयोजित करने और सोशल मीडिया के माध्यम से उनका प्रचार करने का निर्देश दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किया गया बदलाव पूरी तरह अवैध है और निर्वाचन आयोग को इसमें एकतरफा संशोधन करने का अधिकार नहीं है.
