क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने लद्दाख और तिब्बत के संघर्ष की तुलना करने पर भारत में रहने वाले तिब्बती समुदाय से बिना शर्त सार्वजनिक माफ़ी मांगी है. उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था. खुद को तिब्बती संघर्ष का समर्थक बताते हुए वांगचुक ने कहा कि उन्होंने दलाई लामा के लिए “भारत रत्न” की मांग तब की थी जब हर कोई उनके खिलाफ था.
“मेरे दर्द बनाम उनके दर्द’ वाली बहस में न पड़ें. मेरा मकसद कभी भी 8-9 दशकों से चल रहे तिब्बती संघर्ष की तुलना लद्दाख के लोगों द्वारा झेले जा रहे हिंसक दमन (24 सितंबर 2025 को) से करना नहीं था. लेकिन अगर मेरी बातों से किसी को दुख पहुंचा है, तो मैं इसके लिए बिना शर्त माफ़ी मांगता हूं.” सोनम वांगचुक ने वीडियो बयान में कहा,
लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर 24 सितंबर को लेह में सोनम वांगचुक के भाषण ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था. उन्होंने लद्दाख के हालात और चीन द्वारा तिब्बत के साथ किए जा रहे व्यवहार की सीधी तुलना करते हुए दावा किया था कि भारतीय सरकार के तहत लद्दाख के लोगों को जिस प्रशासनिक दमन का सामना करना पड़ रहा है, वह चीन द्वारा तिब्बतियों पर किए जा रहे अत्याचार से भी बदतर है.
धर्मशाला स्थित सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन (CTA)—जो तिब्बत की निर्वासित सरकार है—ने इस तुलना को तुरंत और सख्ती से खारिज करते हुए उनके बयानों को “गलत और बेबुनियाद” बताया.
वांगचुक ने कहा था कि आज़ादी और सम्मान के लिए भारतीय लोकतंत्र को चुनने के बावजूद, लद्दाख को अभी गंभीर स्थानीय दमन और संवैधानिक सुरक्षा की कमी का सामना करना पड़ रहा है; उन्होंने इसकी तुलना तिब्बत के हालात से करते हुए इसे बुरा बताया था.
शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को CTA के प्रवक्ता तेनज़िन लेकशय ने इन बयानों की निंदा करते हुए इन्हें “गलत और बेबुनियाद” बताया और कहा कि ये चीनी कब्जे की गंभीर सच्चाई को नहीं दर्शाते हैं.
CTA ने कहा कि तिब्बती लोग क्रूर सैन्य कब्जे, अधिकारों के व्यवस्थित दमन और अपनी सांस्कृतिक व धार्मिक पहचान को आक्रामक तरीके से मिटाए जाने का सामना कर रहे हैं.
आलोचना का सामना करते हुए वांगचुक ने वीडियो बयान में स्पष्ट किया कि हालांकि वे तिब्बतियों के संघर्ष का सम्मान करते हैं, लेकिन वे लेह में महसूस किए जा रहे गहरे स्थानीय दर्द को बयां कर रहे थे. उन्होंने 2025 की अशांति के दौरान हुई ज़बरदस्त स्थानीय दमन की कार्रवाई—जिसमें इंटरनेट बंद करना, लोगों का घायल होना और आम नागरिकों की मौत शामिल थी—का ज़िक्र करते हुए अपनी स्थानीय नाराज़गी को सही ठहराया.
हालांकि, सोनम वांगचुक ने माफ़ी मांगने वाले अपने नए वीडियो में चेतावनी दी कि लद्दाख में काम कर रही इंटेलिजेंस एजेंसियां इस तरह के विवाद को ‘तिब्बत बनाम लद्दाख’ का मुद्दा बनाकर और ज़्यादा नुकसान पहुंचा रही हैं. इससे लद्दाख के ज़्यादा राजनीतिक अधिकारों के लिए चल रहे संघर्ष का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उछल जाएगा.
सोनम वांगचुक ने कहा, “लद्दाख में जो इंटेलिजेंस एजेंसियां और ग्रुप हमारे दमन करने वालों (सरकार) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, वे जितना ज़्यादा इस बात पर बहस छेड़ेंगे कि ‘कौन ज़्यादा बुरा है—लद्दाख में भारत या तिब्बत में चीन’—उतना ही ज़्यादा वे इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाएंगे.” उन्होंने आगे कहा कि लद्दाख में राजनीतिक अधिकारों के लिए लड़ाई का भारत के साथ लद्दाख के रिश्ते पर कोई सवाल नहीं उठाता, क्योंकि यह रिश्ता हमेशा के लिए है.
वांगचुक ने आगे कहा, “लद्दाख पिछले 70 सालों से खुशी-खुशी भारत का हिस्सा रहा है, लेकिन हम पिछले छह सालों से सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ हैं, और ख़ासकर पिछले साल 24 सितंबर को जो हुआ, उसके ख़िलाफ़ हम संघर्ष कर रहे हैं.”
