चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार और बीजेपी पर निशाना साधा. एक्स पर पोस्ट कर राहुल गांधी ने कहा, ‘सबसे पहले ज्ञानेश कुमार, जो उस समय एक कार्यरत IAS अधिकारी थे, उनका इस्तेमाल बीजेपी के लिए लोगों को भर्ती करने में किया गया. फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बनाया और भारत के चुनावों में मैच-फिक्सिंग करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी.’
राहुल गांधी ने केरल कांग्रेस के एक्स पोस्ट को भी शेयर किया, जिसमें केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन ने दावा किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा था. थॉमसन के अनुसार, दिल्ली जाने वाली एक फ्लाइट के दौरान ज्ञानेश कुमार ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए 2019 में पथानामथिट्टा सीट से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में उतरने का प्रस्ताव दिया था.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि 10 महीनों के दौरान 14 मौकों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी. रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां कई तरह के फैसलों और प्रक्रियाओं से जुड़ी थीं. विवादों के बीच दिल्ली में शनिवार (26 सितंबर 2026) को दोपहर तीन बजे निर्वाचन सदन में चुनाव आयोग की बैठक हुई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त मौजूद रहे. ECI ने साफ किया कि हाल के महीनों में बिहार, बंगाल समेत अन्य राज्यों में SIR को लेकर जो फैसले हुए वह सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे.
चुनाव आयोग के बयान जारी होने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर पलटवार किया. पार्टी नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘एसआईआर के मुद्दे पर चुनाव आयोग के बयान ने कांग्रेस की पोल खोल दी. राहुल गांधी झूठ बोल रहे थे. राहुल गांधी गंभीर नेता नहीं हैं. उनके झूठे प्रचार के कारण निर्वाचन आयोग को एसआईआर पर विस्तृत बयान जारी करना पड़ा. चुनाव आयोग पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय, कांग्रेस और उसके सहयोगियों को चुनाव जीतने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए.’
