- CJP संस्थापक ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की।
- CEC पर भाजपा टिकट पेशकश का गंभीर आरोप लगाया गया।
- साथ ही 13 करोड़ वोटर सूची से हटाने का आरोप भी है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग (ECI) विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर एक अजीब टिप्पणी की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में CEC ज्ञानेश कुमार को ज्ञानू कहकर संबोधित किया और कहा कि ज्ञानू को जाना ही होगा.
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) चीफ अभिजीत दीपके ने एक रिपोर्ट के हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने केरलम के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन को भाजपा के टिकट पर 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पूछा था. उन्होंने एक अन्य X पोस्ट में कहा, ‘ये करवाएंगे मुक्त और निष्पक्ष चुनाव.’
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की दीपके ने की थी मांग
वहीं, एक दिन पहले शुक्रवार (25 सितंबर, 2026) को अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी. उन्होंने अल्टीमेटम देते हुए एक्स पोस्ट में कहा था, ‘अगर ज्ञानेश कुमार ने कल तक यानी शनिवार (26 सितंबर) तक अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया, तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) दो अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की शुरुआत करेगी और इस प्रदर्शन को हम भारत के सभी शहरों तक लेकर जाएंगे.’ उन्होंने कहा, ‘आइए इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने की कसम खाएं.’
वोटर लिस्ट से 13 करोड़ वोटरों के नाम का आरोप- दीपके
Gyanesh, its done bro!
Sign the petition: https://t.co/vx2rfIHt4J pic.twitter.com/dbUsoHZGCx
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) September 24, 2026
इसके अलावा, सीजेपी संस्थापक ने अपने वीडियो पोस्ट में कहा, ‘CEC ज्ञानेश कुमार को इसलिए इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि जब से वो मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, तब से उन्होंने लोकतंत्र की परिभाषा बदल दी है. लोकतंत्र की परिभाषा क्या होती है, जहां पर लोग अपनी मर्जी से सरकार को चुनते हैं, लेकिन जब से ज्ञानेश कुमार सीईसी बने हैं, तब से सरकार ये चुन रही है कि वोटर कौन होगा और कौन नहीं होगा.’
उन्होंने कहा, ‘जब एसआईआर शुरू हुआ है, तब से अब तक देश में 13 करोड़ वोटर के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं. ये 13 करोड़ का नंबर कोई छोटी संख्या नहीं है. 2024 में 97 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर थे, लेकिन एसआईआर के बाद उसमें से 13 करोड़ वोटरों के नाम डिलीट हो चुके हैं.’
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