महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने मीरा-भायंदर के बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता और अन्य पार्षदों पर ‘गंभीर कदाचार’ का आरोप लगाते हुए राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से तत्काल उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग की है. सरनाईक ने सोमवार (19 अक्टूबर) को मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पुलिस के सीनियर अधिकारियों को भी पत्र भेजा है.
पत्र में आरोप लगाया गया है कि 16 अक्टूबर को मेहता 40-50 पार्षदों और सैकड़ों समर्थकों के साथ मीरा-भायंदर नगर निगम आयुक्त राधाबिनोद शर्मा के आवास पर पहुंचे. आरोप है कि भीड़ ने आयुक्त और उनके परिवार को डराने की कोशिश की, ताकि पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे मामले दर्ज कराए जा सकें.
पार्षदों की सदस्यता रद्द करने की मांग
सरनाईक ने पार्षदों की सदस्यता रद्द करने, आरोपियों की गिरफ्तारी और आईएएस अधिकारियों के संगठन की विशेष समिति से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि कड़ी कार्रवाई नहीं होने से प्रशासनिक अधिकारियों का मनोबल और लोकतंत्र कमजोर होगा.
‘खतरे में पड़ सकती थी कमिश्नर और उनके परिवार की जान’
कानून-व्यवस्था के पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाते हुए, सरनाईक ने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को काबू में लाने के लिए पुलिस कमिश्नर निकेत कौशिक को खुद रात 2 से 2:30 बजे के बीच मौके पर पहुंचना पड़ा. उन्होंने कहा कि अगर पुलिस समय पर नहीं पहुंचती, तो नगर निगम आयुक्त और उनके परिवार की जान खतरे में पड़ सकती थी.
उपद्रवियों के खिलाफ सख्त आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज हो- सरनाईक
राज्यपाल को सौंपे गए अपने औपचारिक पत्र में, सरनाईक ने सख्त प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने कहा कि आधी रात को घेराव और पत्रकारों पर हमले में शामिल पार्षदों को ‘महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम’ के संबंधित प्रावधानों के तहत उनके पदों से तुरंत अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए. उन्होंने मांग की कि भीड़ में शामिल सभी उपद्रवियों के खिलाफ सख्त आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया जाए और उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए.
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