Dussehra 2026: मंगलवार, 20 अक्टूबर को दशहरे का पर्व मनाया जाएगा. इस बार दशहरे की सुबह नवमी तिथि रहने से पूजा के समय को लेकर लोगों के मन में सवाल है. पंचांग के अनुसार दोपहर 12:50 बजे नवमी समाप्त होगी और दशमी तिथि शुरू हो जाएगी. ऐसे में घर में भगवान राम की पूजा सुबह करें या दशमी लगने के बाद?
खासकर जिन परिवारों में दशहरे पर शस्त्र पूजन, शमी पूजन और अपराजिता पूजन की परंपरा है, उनके लिए सही मुहूर्त जानना जरूरी है.
दशहरे पर घर में पूजा कब करें?
दशहरे की सुबह नवमी तिथि होने के बावजूद भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी की सामान्य पूजा की जा सकती है. सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाने, भोग लगाने और राम नाम का जाप करने के लिए दशमी शुरू होने का इंतजार जरूरी नहीं है.
हालांकि विजयादशमी की विशेष पूजा के लिए दशमी तिथि का महत्व है. इस बार दशमी दोपहर 12:50 बजे शुरू होगी. ऐसे में शस्त्र पूजन, शमी पूजन और अपराजिता पूजन दोपहर में निर्धारित मुहूर्त के अनुसार करना उचित रहेगा.
दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में कब करें पूजा?
दशहरे पर विजय मुहूर्त का समय स्थान के अनुसार बदलता है. दिल्ली में 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक रहेगा. नोएडा में दोपहर 1:59 से 2:44 बजे तक और गाजियाबाद में दोपहर 1:58 से 2:44 बजे तक विजय मुहूर्त रहेगा. गुरुग्राम में यह समय दोपहर 2:00 से 2:46 बजे तक रहेगा.
इस दौरान भगवान राम की विशेष पूजा के साथ शस्त्र पूजन, शमी पूजन और अपराजिता पूजन किया जा सकता है.
दूसरे प्रमुख शहरों में विजय मुहूर्त
लखनऊ: दोपहर 1:45 से 2:31 बजे तक
जयपुर: दोपहर 2:06 से 2:51 बजे तक
पटना: दोपहर 1:29 से 2:14 बजे तक
मुंबई: दोपहर 2:20 से 3:06 बजे तक
कोलकाता: दोपहर 1:17 से 2:03 बजे तक
भोपाल और अन्य शहरों में स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना चाहिए.
दशहरे की पूजा में दोपहर का समय क्यों महत्वपूर्ण?
धार्मिक परंपरा में विजयादशमी की पूजा के लिए अपराह्न काल का विशेष महत्व माना गया है. दशमी तिथि का अपराह्न काल में होना पर्व के निर्णय का महत्वपूर्ण आधार है. यही वजह है कि दशहरे की पूजा का समय तय करते समय केवल सूर्योदय की तिथि नहीं देखी जाती.
इस बार 20 अक्टूबर को सुबह नवमी रहेगी, लेकिन दोपहर में दशमी शुरू हो जाएगी. दशमी तिथि अगले दिन 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे तक रहेगी.
घर में कैसे करें दशहरे की पूजा?
विजय मुहूर्त में घर के पूजा स्थान की सफाई कर भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा करें. दीपक जलाएं और पुष्प, अक्षत व भोग अर्पित करें. इसके बाद परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें.
जिन परिवारों में शमी पूजन की परंपरा है, वे शमी वृक्ष की पूजा कर सकते हैं. वहीं शस्त्र पूजन की परंपरा वाले परिवार अपनी मान्यता के अनुसार पूजा कर सकते हैं. कई स्थानों पर दशहरे के दिन व्यापार से जुड़े उपकरणों और औजारों की पूजा भी की जाती है.
विजय मुहूर्त छूट जाए तो क्या करें?
यदि किसी कारण से विजय मुहूर्त में पूजा नहीं कर पाते हैं तो भगवान राम की सामान्य पूजा बाद में भी की जा सकती है. हालांकि विजयादशमी के विशेष अनुष्ठानों के लिए स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार उपयुक्त समय का ध्यान रखना चाहिए.
इस बार दशहरे पर सुबह सामान्य पूजा करने में कोई बाधा नहीं है, लेकिन शस्त्र पूजन, शमी पूजन और अपराजिता पूजन के लिए दोपहर में दशमी तिथि शुरू होने के बाद का मुहूर्त अधिक उपयुक्त रहेगा.
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