टाइगर श्रॉफ की कार पर जुहू में हुई फायरिंग के बाद जिस नाम ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, वो है अनिल पंडित. यह वही शख्स है जिसने ऑडियो मैसेज भेजकर हमले की जिम्मेदारी ली और खुद को लॉरेंस बिश्नोई का ‘छोटा भाई’ बताया. सवाल यह है कि पानीपत के राई कलां गांव का यह युवा, जिसका 2023 तक कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, अचानक अमेरिका बैठकर भारत में शूटरों को गोली चलवाने वाला ‘खास हैंडलर’ कैसे बन गया?
यह कहानी विदेश में बैठे एक ऐसे नेटवर्क की है, जो एन्क्रिप्टेड ऐप्स से भारत में हाई-प्रोफाइल वारदातों को अंजाम दे रहा है. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के मुताबिक, पंडित अब हरियाणा में जबरन वसूली के 12 से ज्यादा मामलों में वांटेड है.
पहले ये समझो: शुरुआत कहां से हुई?
अनिल पंडित मूल रूप से हरियाणा के पानीपत जिले के राई कलां गांव का रहने वाला है. पुलिस रिकॉर्ड कहते हैं कि 2023 में भारत छोड़ने से पहले उसका कोई ‘खास आपराधिक रिकॉर्ड’ नहीं था. यानी वह पेशेवर अपराधी नहीं था. वह पहले कनाडा गया और वहीं उसकी मुलाकात रणदीप मलिक नाम के एक गैंगस्टर से हुई, जो लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़ा हुआ था. यहीं से पंडित की जिंदगी का रुख बदला.
रणदीप मलिक के संपर्क में आने के बाद वह अमेरिका के कैलिफोर्निया पहुंचा और वहां से बिश्नोई गिरोह के लिए काम करना शुरू कर दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब आठ महीने पहले उसने रणदीप मलिक की जगह ली और गिरोह का भरोसेमंद ऑपरेटर बन गया.
‘हैंडलर’ बनने का मतलब क्या है?
यहां ‘हैंडलर’ शब्द को समझना जरूरी है. इसका मतलब यह नहीं कि पंडित खुद गोली चलाता है. पंडित का काम विदेश से बैठकर भारत में शूटरों को चुनना, उन्हें टारगेट बताना, हथियार और पैसे का इंतजाम करना और वारदात के बाद जिम्मेदारी का ऐलान करना है.
इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, पंडित सिग्नल ऐप के जरिए सभी किराए के शूटरों से बात करता है और उन्हें भेजता है. वह खुद कैलिफोर्निया में बैठा रहता है, जबकि भारत में एक ‘लोकल मॉड्यूल’ रेकी, हथियार जुटाने और हमले की फाइनल प्लानिंग करता है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह विदेश से ही जबरन वसूली की कॉल करवाता है और सेलिब्रिटीज, कारोबारियों को डराने के लिए हमले करवाता है.
अनिल पंडित ने नेटवर्क कैसे बढ़ाया?
पंडित का नाम पिछले कुछ महीनों में तीन बड़ी वारदातों में सामने आया है. यही उसके ‘हैंडलर’ बनने की कहानी बताता है:
- गुरु रंधावा के जिम पर फायरिंग: दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में स्थित ’24HS फिटनेस’ जिम के बाहर दो बाइक सवारों ने फायरिंग की. यह जिम पंजाबी सिंगर गुरु रंधावा से जुड़ा है. जांच में पता चला कि पंडित ही वह शख्स था जिसने हमलावरों से संपर्क किया और हमले से पहले पूरी प्लानिंग कोऑर्डिनेट की. दिल्ली पुलिस ने इस केस में उसके खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट जारी किया है.
- दिलेर खरकिया की गाड़ी पर फायरिंग: भिवानी में सिंगर दिलेर खरकिया की गाड़ी पर हुई गोलीबारी को पुलिस ने जबरन वसूली की मांग पूरी न होने पर दी गई ‘चेतावनी’ माना. इस केस में भी पंडित का नाम सामने आया. कथित शूटर को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और सोनीपत एसटीएफ ने मिलकर पकड़ा.
- टाइगर श्रॉफ पर हमला: जुहू में हुई इस फायरिंग के तुरंत बाद पंडित ने एक ऑडियो क्लिप जारी की, जिसमें उसने हमले की जिम्मेदारी ली और सलमान खान को चेतावनी दी कि जब तक वह लॉरेंस बिश्नोई और बिश्नोई समाज से माफी नहीं मांगेगा, गिरोह पीछा नहीं छोड़ेगा. कोटा पुलिस ने इस केस में तीन आरोपियों को ट्रेन से पकड़ा और जांच में सामने आया कि पंडित का इन आरोपियों से सीधा संपर्क था.
इन तीनों केसों में एक बात कॉमन है कि पंडित का नाम हमेशा ‘कोऑर्डिनेटर’ के तौर पर आता है, कभी ‘शूटर’ के तौर पर नहीं. वह विदेश में बैठकर ऑपरेशन चलाता है और भारत में उसके लोकल मॉड्यूल के लोग असल वारदात को अंजाम देते हैं.
पैसा और दहशत: हैंडलर की ‘कीमत’
पंडित सिर्फ हमले नहीं करवाता, बल्कि जबरन वसूली का पूरा नेटवर्क चलाता है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, वह पानीपत, सोनीपत और करनाल के कारोबारियों को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर फोन करके ‘प्रोटेक्शन मनी’ की मांग करता है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट कहती है कि वह ऐसे 10 से 12 मामलों में वांटेड है. सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी का ऐलान करना भी उसकी रणनीति का हिस्सा है. इससे टारगेट के मन में डर पैदा होता है और गिरोह का ‘रौब’ बना रहता है.
नतीजा: यह ‘देशभक्ति’ नहीं, सिर्फ मुनाफे का धंधा
अनिल पंडित की कहानी यह बताती है कि लॉरेंस बिश्नोई गिरोह अब पहले जैसा नहीं रहा. पहले शूटर गैंग का पक्का हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन अब विदेश में बैठे ‘हैंडलर’ भारत में किराए के शूटरों से काम करवाते हैं. पंडित ने 2023 में भारत छोड़ा, कनाडा होते हुए अमेरिका पहुंचा और सिर्फ दो साल के अंदर 12 से ज्यादा जबरन वसूली के मामलों में वांटेड हो गया.
पंडित का केस यह भी दिखाता है कि विदेशी जमीन से भारत में अपराध चलाना अब गिरोहों के लिए नया हथियार बन गया है. पंडित उस हथियार का सबसे चर्चित चेहरा है. पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण को जांच का अहम हिस्सा मान रही है.
