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‘SIR से जुड़े सभी फैसले…’, चुनाव आयोग के हलफनामे पर क्या बोले पूर्व चुनाव आयुक्त


देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के हलफनामे को लेकर भोपाल में कहा, “मुझे लगता है कि यह सही है, क्योंकि जब CEC और चुनाव आयोग की ओर से हलफनामा आया है तो यह बिल्कुल सही होगा. मुझे लगता है कि ये सही है और SIR से जुड़े सभी फैसले फाइल पर लिए गए होंगे, जिस पर तीनों ने हस्ताक्षर किए होंगे. 

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए ओपी रावत ने कहा कि अगर ये फैसले आयोग में लिए गए हैं तो आयोग की बैठक में इस पर आम सहमति बनी होगी. उन्होंने आगे कहा कि इसमें उन्होंने जो बिंदुवार जवाब दिया है, उस पर भरोसा किया जाना चाहिए. ओपी रावत ने कहा कि उन्होंने जो बिंदुवार जवाब दिया है हमें उसी आधार पर आगे बढ़ना चाहिए. बाकी बातें तभी पता चलेंगी जब पूरा मामला विस्तार से सामने आएगा. 

ECI की विश्वसनीयता पर क्या कहा
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता बहाल करने को लेकर उन्होंने कहा कि ये वाकई बहुत चुनौतीपूर्ण होगा, क्योंकि जिस तरह से इलेक्शन कमीशन की साख पर आंच आई है. इसके बाद उन्होंने ओडिशा की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर 7-8 बीएलओ ने एक थाने में जाकर शिकायत की है कि हमारे अधिकारियों ने हमसे ही कागजात लेकर कई लोगों के नाम डिलीट किए हैं. इससे बड़ी चिंता जाहिर होती है.

रावत ने कहा कि बीएलओ के मन में ही कमीशन को लेकर चिंता है वो ही सवाल उठा रहे हैं. उन्हें आयोग से ज्यादा पुलिस पर भरोसा है इसलिए उन्होंने थाने में जाकर एफआई करा दी. इससे कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बीएलओ लेवल तक क्यों ऐसी नौबत आई. इसमें देखना होगा कि सुधार की कहां गुंजाइश है और हमें कहां सुधार करना चाहिए. 

इलेक्शन कमीशन की जवाबदेही पर क्या कहा
क्या इलेक्शन कमीशन को जनता के सामने आकर अपना पक्ष नहीं रखना चाहिए था क्योंकि कोर्ट में तो उनको जवाब देना ही पड़ेगा, इस सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि अगर शुरू में ही इलेक्शन कमीशन पब्लिक के सामने आ जाता और सारे तथ्यों को लेकर सिलसिलेवार ढंग से पूरी जानकारी देता और तीनों चुनाव आयुक्त एक साथ आकर इस पर पूरी जानकारी देते तो पब्लिश के मन में किसी तरह का संशय नहीं होता, जनता को चुनाव आयोग पर शक करने की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती.

उन्होंने आगे कहा कि इलेक्शन कमीशन की साख पर जो भी आंच आई है इसकी कहीं कोई गुंजाइश ही नहीं बचती क्योंकि ये मामला नहीं उठता और इसे लेकर इस तरह देश भर में आंदोलन भी नहीं होते. मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर उन्होंने कहा कि राजनीतिक मांगों पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता.

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