पुणे की एक व्यस्त सड़क पर इंसानियत की मिसाल पेश करने वाली घटना सामने आई, जहां एक गर्भवती महिला ने सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म दिया. प्रसव पीड़ा बढ़ने पर महिला अस्पताल तक नहीं पहुंच सकी और वहीं बैठ गई. मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए डॉ. सुनीता पोटे को बुलाया.
डॉक्टर बिना देर किए घटनास्थल पर पहुंचीं और सड़क पर ही सुरक्षित डिलीवरी करवाई. इस दौरान उन्होंने न केवल मां बल्कि नवजात की भी पूरी देखभाल की. दोनों को बाद में अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि मुश्किल समय में संवेदनशीलता और तत्परता किसी की जान बचा सकती है.
डॉक्टर ने सड़क पर ही कराया प्रसव
जानकारी के अनुसार, यह साफ था कि अगर तुरंत प्रसव नहीं कराया गया, तो मां या बच्चे दोनों में से किसी के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता था. नतीजतन, एक भी पल बर्बाद किए बिना उन्होंने वहीं सड़क पर ही प्रसव कराने का फैसला किया. सबकी नजरें इस मेडिकल प्रक्रिया पर टिकी थीं और माहौल तनावपूर्ण था. हर कोई पूरी शिद्दत से प्रार्थना कर रहा था, तभी अचानक एक नवजात शिशु के रोने की आवाज गूंज उठी.
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मां और बच्चा दोनों सुरक्षित
डॉ.सुनीता पोटे खड़ी हुईं और अपनी बाहों में उस नन्हे शिशु को ले लिया. शिशु को सुरक्षित देखकर सबने राहत की सांस ली. तनावपूर्ण स्थिति तुरंत ही खुशी के माहौल में बदल गई. डॉ. पोटे सचमुच इस मां और उसके बच्चे की मदद के लिए एक फरिश्ते की तरह दौड़ी चली आईं. इस पूरी घटना ने इंसानियत की कभी न मिटने वाली भावना की एक खूबसूरत झलक पेश की.
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