युद्ध के मैदान में सच दिखाने वाले पत्रकार अगर खुद निशाने पर आ जाएं तो मामला सिर्फ एक मौत का नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी बन जाता है. लेबनान से आई एक खबर ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है, जहां एक महिला पत्रकार की मौत ने अंतरराष्ट्रीय कानून, इंसानियत और युद्ध के नियमों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. दावा किया जा रहा है कि पहले हमला हुआ, फिर बचाने पहुंचे लोगों को भी निशाना बनाया गया. इस पूरे मामले को लेकर इंटरनेट पर गुस्सा, बहस और चिंता तीनों एक साथ देखने को मिल रहे हैं.
कौन थीं अमल खलील?
42 साल की अमल खलील लेबनान के मशहूर अखबार al-Akhbar की रिपोर्टर थीं. उनका जन्म दक्षिण लेबनान के सैदा इलाके में हुआ था और उन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा संघर्ष और युद्ध के माहौल में बिताया. साल 2006 से वह पत्रकारिता कर रही थीं और खासतौर पर दक्षिण लेबनान के मुद्दों को कवर करती थीं. लोगों के बीच उनकी पहचान एक जमीनी पत्रकार और एक्टिविस्ट के तौर पर थी.
क्या हुआ था उस दिन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमल खलील अपनी साथी फोटो जर्नलिस्ट जैनब फराज के साथ एक हमले की कवरेज कर रही थीं. तभी उनके सामने एक गाड़ी पर एयर स्ट्राइक हुआ. दोनों अपनी जान बचाने के लिए पास के एक घर में छिप गईं. दावा है कि उन्होंने प्रेस जैकेट पहन रखी थी, ताकि उनकी पहचान साफ हो सके. लेकिन मामला यहीं नहीं रुका. जैसे ही राहत टीमें उन्हें बचाने पहुंचीं, उसी घर पर दूसरा हमला हो गया. इस “डबल स्ट्राइक” ने पूरे मामले को और ज्यादा गंभीर बना दिया. रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया कि बचाव दल को भी निशाना बनाया गया, जिसके बाद पत्रकार अमल खलील की मौत हो गई. अब सोशल मीडिया पर लोगों में भारी गुस्सा फैल गया.
क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून
Geneva Conventions के मुताबिक, युद्ध के दौरान पत्रकारों को आम नागरिक माना जाता है और उन्हें निशाना बनाना गैरकानूनी है, जब तक कि वे किसी लड़ाई में हिस्सा न लें. अगर जानबूझकर पत्रकारों या बचाव टीम पर हमला किया गया है, तो इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है. लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इस हमले को “वार क्राइम” बताया है और कहा है कि इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया जाएगा. हालांकि इजराइल ने इन आरोपों से इनकार किया है.
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सोशल मीडिया पर क्यों मचा बवाल?
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि अगर पत्रकार भी सुरक्षित नहीं हैं तो सच दुनिया तक कैसे पहुंचेगा. कई लोगों ने #JournalistsUnderAttack और #WarCrime जैसे हैशटैग के साथ अपनी नाराजगी जताई.
कुछ यूजर्स का कहना है कि “डबल स्ट्राइक” जैसी घटनाएं जानबूझकर डर फैलाने के लिए की जाती हैं, जबकि कुछ लोग इसे सीधा अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहे हैं.
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