अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा है. राज्यसभा ने राघव चड्ढा समेत AAP के सभी बागी सांसदों को मान्यता दे दी है और उन्हें भारतीय जनता पार्टी का सांसद मान लिया गया है. इसको लेकर राज्यसभा सचिवालय ने नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है.
राज्यसभा सचिवालय ने आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल हुए सभी सांसदों को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है. उन्हें बीजेपी का हिस्सा बताया गया है, जिसके बाद अब उच्च सदन में बीजेपी के सदस्यों की संख्या बढ़कर 113 पहुंच गई है.
AAP ने उपराष्ट्रपति को लिखी थी चिट्ठी
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने रविवार (26 अप्रैल, 2026) को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने AAP छोड़ने वाले सातों सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी. चिट्ठी में लिखा गया है, ‘ये सांसद आम आदमी पार्टी की टिकट पर उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए थे, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का फैसला किया.’
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संजय सिंह ने कहा था कि आप के सातों सांसदों की ओर से उठाया गया ये कदम दल-बदल के समान है. यह पंजाब की जनता और भारत के संविधान के साथ विश्वासघात है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर आम आदमी पार्टी इस मामले में कानूनी कदम उठाएगी. हालांकि अब राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी हुए नोटिफिकेशन से ये स्पष्ट हो गया है कि आम आदमी पार्टी की मांग को खारिज कर दिया गया है. अब इन सांसदों को भारतीय जनता पार्टी का माना जाएगा, जबकि आम आदमी पार्टी के उच्च सदन में सिर्फ तीन ही सांसद रह गए हैं.
राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने छोड़ी AAP
राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने शुक्रवार (24 अप्रैल, 2026) को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आम आदमी पार्टी से अलग होने का ऐलान किया था. उन्होंने दावा किया था कि उनके साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता भी हैं. पार्टी छोड़ने वाले 7 में से 6 पंजाब से राज्यसभा सदस्य हैं.
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इन सांसदों ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटक गई है. चड्ढा ने कहा, ‘संविधान के अनुसार, किसी पार्टी के कुल सांसदों में से दो-तिहाई सांसद दूसरी पार्टी में विलय कर सकते हैं.’
