CBSE 10th Exam: बीएसई बोर्ड ने बीते दिनों दसवीं क्लास के नतीजे जारी किए थे. इस बार खास बात ये है कि बोर्ड की तरफ से क्लास 10वीं के छात्रों को अपनी परफॉर्मेंस सुधारने का एक और मौका दिया गया है. पहली बार बोर्ड ने छात्रों को उसी साल दूसरी परीक्षा देने की सुविधा दी है और इस मौके को छात्रों ने पूरे जोश के साथ अपनाया है.
बोर्ड के अनुसार करीब 6.69 लाख छात्रों ने मई में होने वाली दूसरी परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. यह संख्या उन छात्रों का लगभग 27 प्रतिशत है, जो फरवरी-मार्च में हुई मुख्य परीक्षा में शामिल हुए थे. यानी हर चार में से एक छात्र अब फिर से परीक्षा देने जा रहा है, ताकि अपने अंकों को बेहतर बना सके.
इस बार छात्रों को विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, गणित और भाषा विषयों में से अधिकतम तीन विषय चुनने की छूट दी गई. आंकड़ों के अनुसार लगभग 1.93 लाख छात्रों ने एक विषय, 2.79 लाख छात्रों ने दो विषय और 1.97 लाख छात्रों ने तीन विषयों में सुधार परीक्षा देने के लिए फॉर्म भरा है. यह दिखाता है कि छात्र अपने रिजल्ट से संतुष्ट बैठने के बजाय खुद को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
इस सब्जेक्ट के लिए सबसे ज्यादा पंजीकरण
सब्जेक्ट्स की बात करें तो विज्ञान के लिए सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुआ है. करीब 4.74 लाख छात्र विज्ञान का पेपर दोबारा देंगे. इसके बाद गणित (स्टैंडर्ड) के लिए 3.69 लाख, गणित (बेसिक) के लिए 1.79 लाख, सामाजिक विज्ञान के लिए 1.55 लाख और अंग्रेजी भाषा व साहित्य के लिए करीब 98 हजार छात्रों ने आवेदन किया है. CBSE कक्षा 10 में गणित को दो स्तर पर कराता है- स्टैंडर्ड और बेसिक.
इस बार भी सुधार परीक्षा में लड़कों की संख्या लड़कियों से ज्यादा है. करीब 3.10 लाख लड़कों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. हालांकि बड़ी संख्या में लड़कियां भी इस अवसर का लाभ उठा रही हैं. फरवरी-मार्च में हुई मुख्य परीक्षा में करीब 24.72 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे. इनमें 13.85 लाख लड़के और 10.87 लाख लड़कियां थीं. इस साल पास प्रतिशत 93.7% रहा. रिजल्ट 15 अप्रैल को घोषित कर दिया गया, जो पिछले साल की तुलना में काफी पहले था.
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कब होगी परीक्षा?
दूसरी परीक्षा 15 मई से 21 मई के बीच आयोजित की जाएगी. बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार इस बार परीक्षा केंद्रों की संख्या मुख्य परीक्षा से कम रखी जाएगी. खास बात यह है कि जो छात्र दोबारा परीक्षा दे रहे हैं, उनके लिए दोनों परीक्षाओं में से बेहतर अंक ही फाइनल माने जाएंगे.
CBSE का यह कदम नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार उठाया गया है. इस नीति में बोर्ड परीक्षाओं के दबाव को कम करने और छात्रों को सुधार का मौका देने पर जोर दिया गया है. पहले एक बार पेपर खराब होने पर छात्रों को पूरे साल इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब उसी साल दूसरा मौका मिल रहा है.
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