उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में छतरवारा गांव के प्राचीन पहाड़ में बुधवार दोपहर संदिग्ध परिस्थितियों में भीषण आग लग गई. देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिसकी चपेट में आने से पहाड़ पर स्थित विशालकाय पेड़ धू-धू कर जलने लगे. इस घटना से पूरे ग्रामीण क्षेत्र में हड़कंप मच गया है.
सूचना पर पहुंची दमकल टीम ने बमुश्किल आग पर काबू किया. इस दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, जबकि ग्रामीणों के मुताबिक आग बढ़ने का कारण तेज हवा थी. फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है. इस दौरान काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल रहा.
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छतरवारा गांव के पहाड़ों में लगी आग
जैतपुर ब्लॉक कर छतरवारा गांव के पहाड़ पर लगी आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें काफी दूर से देखी जा सकती थीं. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार तेज हवाओं के कारण आग तेजी से नीचे की ओर बढ़ रही है. पहाड़ की तलहटी में बने घरों पर आग पहुंचने की आशंका ने ग्रामीणों को दहशत के साए में जीने को मजबूर कर दिया है. आग इतनी तेजी से फैल रही थी जिससे उनके आशियाने भी इसकी चपेट में आने का डर बढ़ता जा रहा था.
दमकल टीम आग बुझाने में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही राजस्व और वन विभाग की टीम हरकत में आ गई. जैतपुर वन रेंज के सेक्शन अफसर अश्विनी कुमार ने बताया कि दोपहर विभागीय टीम को पहाड़ में आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी. सूचना मिलते ही दमकल कर्मियों को मौके पर रवाना किया गया. वर्तमान में फायर ब्रिगेड प्रभारी जहर सिंह और क्षेत्रीय लेखपाल सिम्मी सिंह सहित भारी संख्या में कर्मचारी और ग्रामीण आग पर काबू पाने के प्रयास में जुटे हुए हैं. दमकल की गाड़ियां लगातार पानी की बौछार कर आग को आबादी वाले क्षेत्र की ओर बढ़ने से रोकने में लगी हैं.
आखिरकार टीम और दमकल कर्मियों की कड़ी मशक्कत के बाद आग के एक बड़े हिस्से पर काबू पा लिया गया है. हालांकि, पहाड़ के कुछ दुर्गम स्थानों पर अभी भी आग सुलग रही है. सेक्शन अफसर अश्विनी कुमार ने आश्वासन दिया है कि टीम पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है और शेष स्थानों पर भी जल्द ही आग को पूरी तरह बुझा दिया जाएगा.
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
प्राचीन पहाड़ और वन क्षेत्र में यह आग कैसे लगी, इसके कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है. प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य आग पर पूर्ण नियंत्रण पाना है. घटना के बाद से वन विभाग की टीम पूरे क्षेत्र की निगरानी कर रही है ताकि आग महोबा: छतरवारा के प्राचीन पहाड़ पर भड़की भीषण आग, दोबारा न भड़क सके.
