- अशोक गहलोत ने श्रमिकों की चिंता में CM को पत्र लिखा.
- राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी देश के निचले स्तर पर.
- महंगाई के मुकाबले मजदूरी वृद्धि बेहद कम है.
- गहलोत ने मजदूरी बढ़ाने व छह माह में संशोधन के सुझाव दिए.
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में न्यूनतम मजदूरी की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने न्यूनतम मजदूरी की दरों में सुधार के सुझाव दिए हैं. गहलोत ने अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर लिखे इस पत्र में राजस्थान के लाखों श्रमिकों की आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की. गहलोत ने राज्य में न्यूनतम मजदूरी की दरों को देश के अन्य प्रगतिशील राज्यों की तुलना में बेहद कम बताते हुए इसमें तत्काल सुधार के लिए ठोस सुझाव दिए हैं.
एक बयान के अनुसार पत्र में गहलोत ने राजस्थान सरकार के श्रम विभाग के आंकड़ों के हवाले से लिखा है कि ‘मार्च 2026 तक राजस्थान न्यूनतम मजदूरी के मामले में देश के निचले स्तर के राज्यों में शामिल है, यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है जिसमें सुधार की आवश्यकता है.’
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गहलोत ने न्यूनतम मजदूरी पर जताई चिंता
इसके अनुसार, ‘वर्तमान में राजस्थान में अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी मात्र 7,410 रुपये प्रतिमाह और अत्यधिक कुशल श्रमिकों के लिए 9,334 रुपये प्रतिमाह है. पिछले एक दशक में यह मजदूरी केवल 40-50 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि इसी अवधि में भारत का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) लगभग दोगुना हो चुका है. इसका सीधा अर्थ है कि श्रमिकों की वास्तविक क्रय शक्ति में केवल 20-30 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि हुई है एवं शेष वृद्धि महंगाई की भेंट चढ़ गई.’ गहलोत द्वारा लिखे गए पत्र के अनुसार,’तुलनात्मक रूप से केरल में 90-110 प्रतिशत, तमिलनाडु और दिल्ली में 80-90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. राजस्थान इन राज्यों से बहुत पीछे है जो बहुत चिंताजनक है.’
गहलोत ने न्यूनतम मजदूरी में सुधार के लिए दिए सुझाव
उन्होंने हालात में सुधार के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं, जिनमें न्यूनतम मजदूरी को 12,000-15,000 रुपये प्रतिमाह की सीमा में तत्काल संशोधित करना शामिल है. साथ ही वेरिएबल डियरनेस अलाउंस (VDA) संशोधन को प्रत्येक छह माह में स्वतः और अनिवार्य रूप से लागू करने की व्यवस्था करने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि श्रमिकों को महंगाई से वास्तविक सुरक्षा मिले. इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया है कि केरल और तमिलनाडु की भांति राजस्थान में भी क्षेत्र-विशिष्ट मजदूरी अधिसूचना प्रणाली विकसित की जाए, जिससे कृषि, निर्माण, हस्तशिल्प, घरेलू सेवा आदि के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित हो सकें.
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