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AI के दौर में क्यों परेशान हैं भारत के युवा? फाउंडर ने बताई काम की बात


भारत में पढ़ाई पूरी करने के बाद अच्छी नौकरी, फिर अच्छी कमाई और धीरे-धीरे अपना घर खरीदकर जिंदगी सेट करने का सपना आज भी करोड़ों युवा देखते हैं. लेकिन क्या यह सपना अब पहले जैसा आसान नहीं रहा? बेंगलुरु के स्टार्टअप फाउंडर रोहन मय्या ने सोशल मीडिया पर इसी सवाल को उठाते हुए बताया है कि आखिर भारत के पढ़े-लिखे युवाओं में गुस्सा और निराशा क्यों बढ़ रही है.

उनके मुताबिक डिग्री लेने, नौकरी पाने और मेहनत करके संपत्ति बनाने वाला पुराना फॉर्मूला अब कमजोर पड़ता दिख रहा है. इसके पीछे बेरोजगारी, महंगाई, बढ़ती घरों की कीमतें और सबसे बड़ी वजह के तौर पर AI से बदलता जॉब मार्केट बताया गया है. रोहन का कहना है कि देश में पढ़े-लिखे युवा तो लाखों की संख्या में तैयार हो रहे हैं, लेकिन उनके लिए उस हिसाब से काम मौजूद नहीं है.

हर साल लाखों युवा डिग्री लेकर निकल रहे, लेकिन नौकरी कहां है?

Aeos Games के को-फाउंडर और Y Combinator से जुड़े रहे रोहन मय्या ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि भारत हर साल करीब 1 करोड़ ग्रेजुएट तैयार करता है. इनमें करीब 15 लाख इंजीनियर होते हैं. यानी हर साल बड़ी संख्या में युवा डिग्री और तकनीकी स्किल लेकर नौकरी की तलाश में निकलते हैं. समस्या यह है कि इन सभी के लिए पर्याप्त और अच्छी नौकरियां मौजूद नहीं हैं.

रोहन के मुताबिक कोविड के बाद से ही नौकरी का बाजार कई तरह की मुश्किलों से गुजर रहा है. इसके बाद 2023 के आसपास AI की रफ्तार बढ़ी और टेक कंपनियों में कई दौर की छंटनी देखने को मिली. इसका असर खास तौर पर उन युवाओं पर पड़ा जो करियर की शुरुआत करने की तैयारी कर रहे थे. उनके सामने सवाल है कि पढ़ाई और स्किल हासिल करने के बाद आखिर जाएं तो जाएं कहां.

कभी टेक नौकरी सपना थी, अब उसी में डर क्यों?

भारत में लंबे समय तक टेक्नोलॉजी और IT की नौकरियां युवाओं के लिए सबसे बड़ा सहारा बनी रहीं. अच्छी सैलरी, शहर में नौकरी और करियर में आगे बढ़ने के मौके ने लाखों युवाओं को इस सेक्टर की तरफ खींचा. लेकिन AI के आने के बाद तस्वीर बदल रही है. कई ऐसे काम जिन्हें पहले इंसान करते थे, अब उन्हें AI टूल्स के जरिए तेजी से किया जा सकता है.

रोहन का कहना है कि एंट्री लेवल की टेक नौकरियां कम हो रही हैं और दूसरी तरफ पहले से नौकरी कर रहे कुछ टेक प्रोफेशनल्स भी छंटनी का सामना कर चुके हैं. ऐसे में नए ग्रेजुएट्स के लिए शुरुआत करना ही मुश्किल हो रहा है. यही स्थिति युवाओं में निराशा को और बढ़ा रही है.

टेक के अलावा दूसरा रास्ता भी आसान नहीं

रोहन ने यह सवाल भी उठाया कि अगर टेक सेक्टर में मौके कम हो रहे हैं तो युवाओं के पास दूसरा विकल्प क्या है. उनके मुताबिक भारत में आम युवा के लिए मैन्युफैक्चरिंग में प्रवेश करना आसान नहीं है. रिसर्च और डेवलपमेंट पर भी देश का खर्च कम है. उन्होंने भारत के R&D खर्च को GDP का करीब 0.7 फीसदी बताया.

उनका कहना है कि जो युवा रिसर्च करना चाहते हैं, उनमें से कई को बेहतर अवसरों के लिए विदेश जाना पड़ता है. वहीं जमीन पर कारोबार शुरू करने में भी कई तरह की दिक्कतें आती हैं. उन्होंने भ्रष्टाचार, सरकारी प्रक्रिया और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी समस्याओं का भी जिक्र किया. यानी सॉफ्टवेयर सेक्टर के अलावा ऐसा आसान रास्ता नजर नहीं आता, जहां बड़ी संख्या में युवा अपना करियर बना सकें.

नौकरी नहीं तो कमाई की कीमत भी कम महसूस होने लगी

रोहन ने युवाओं की परेशानी को सिर्फ बेरोजगारी तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने बढ़ती महंगाई को भी बड़ी वजह बताया. उनका कहना है कि अगर किसी व्यक्ति की कमाई बढ़ भी रही है तो महंगाई उसकी कमाई की असली ताकत को कम कर रही है. यानी जो पैसा आज हाथ में है, उससे पहले जितनी चीजें खरीदी जा सकती थीं, अब उतनी आसानी से नहीं खरीदी जा रहीं.

उन्होंने शेयर बाजार और बचत से मिलने वाले फायदे पर भी सवाल उठाया. उनके मुताबिक लोगों को अपनी बचत से वैसा पूंजीगत फायदा नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी. दूसरी तरफ घर और जमीन की कीमतें लगातार इतनी बढ़ गई हैं कि आम युवा के लिए अपना घर खरीदना भी बड़ा लक्ष्य बन गया है.

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घर खरीदना युवाओं के लिए सपना क्यों बनता जा रहा?

रोहन ने सोशल मीडिया पोस्ट में रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि घरों की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि औसत अपार्टमेंट भी करीब 3 लाख डॉलर तक का बताया जा रहा है. उनके इस दावे का मकसद यह बताना था कि आज का युवा सिर्फ नौकरी पाने के लिए संघर्ष नहीं कर रहा, बल्कि नौकरी मिलने के बाद भी घर और भविष्य सुरक्षित करने की चुनौती उसके सामने खड़ी है.

यानी पहले जहां नौकरी मिलने के बाद अगला लक्ष्य बचत और अपना घर माना जाता था, वहीं अब कई युवाओं के लिए नौकरी हासिल करना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. नौकरी मिल भी जाए तो महंगाई और रियल एस्टेट की कीमतें उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा खा सकती हैं.

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, यूजर्स बोले- बात में दम तो है

रोहन मय्या की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई. कुछ लोगों ने उनकी बात से सहमति जताई और कहा कि आज के युवाओं के सामने डिग्री लेने के बाद भी नौकरी और आर्थिक सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है. वहीं कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ AI को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा, क्योंकि रोजगार की समस्या के पीछे कई दूसरे कारण भी हैं.

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