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BP Risk in Adulthood Study : बचपन में जूस और मीठे ड्रिंक्स पीना पड़ सकता है भारी! बढ़ सकता है हाई BP का खतरा


यह रिसर्च Circulation जर्नल में प्रकाशित हुई है. इसमें अमेरिका के 25,000 से ज्यादा लोगों को करीब 25 साल तक फॉलो किया गया. यह इस तरह की सबसे लंबी स्टडी में से एक मानी जा रही है. रिसर्च में पाया गया कि जो बच्चे और टीन एजर्स रोजाना दो या उससे ज्यादा बार चीनी वाले ड्रिंक्स पीते थे, उनमें बड़े होने पर हाई ब्लड प्रेशर का खतरा उन लोगों की तुलना में 52 प्रतिशत ज्यादा था, जो इन ड्रिंक्स का सेवन हफ्ते में तीन बार से भी कम करते थे. वहीं जो बच्चे रोजाना डेढ़ या उससे ज्यादा सर्विंग फ्रूट जूस पीते थे, उनमें हाई BP का खतरा 35 प्रतिशत ज्यादा पाया गया.

रिसर्च में साफ किया गया है कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि फल खाना नुकसानदायक है. स्टडी के अनुसार, चीनी किस रूप में ली जा रही है, यह भी उतना ही जरूरी है जितनी उसकी मात्रा, पूरे फल में मौजूद प्राकृतिक शुगर और जूस में मौजूद शुगर का असर शरीर पर अलग-अलग होता है. रिसर्च में यह भी पाया गया कि अगर रोजाना एक बार मीठे ड्रिंक की जगह पूरा फल खाया जाए, तो हाई ब्लड प्रेशर का खतरा 22 प्रतिशत तक कम हो सकता है. वहीं फ्रूट जूस की जगह पूरा फल खाने से यह जोखिम 19 प्रतिशत तक घट सकता है.

रिसर्च में साफ किया गया है कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि फल खाना नुकसानदायक है. स्टडी के अनुसार, चीनी किस रूप में ली जा रही है, यह भी उतना ही जरूरी है जितनी उसकी मात्रा, पूरे फल में मौजूद प्राकृतिक शुगर और जूस में मौजूद शुगर का असर शरीर पर अलग-अलग होता है. रिसर्च में यह भी पाया गया कि अगर रोजाना एक बार मीठे ड्रिंक की जगह पूरा फल खाया जाए, तो हाई ब्लड प्रेशर का खतरा 22 प्रतिशत तक कम हो सकता है. वहीं फ्रूट जूस की जगह पूरा फल खाने से यह जोखिम 19 प्रतिशत तक घट सकता है.

पूरे फल में फाइबर होता है, जो शरीर में शुगर को धीरे-धीरे अवशोषित होने में मदद करता है. इससे ब्लड शुगर और इंसुलिन का स्तर अचानक नहीं बढ़ता है. लेकिन जूस बनाने के दौरान ज्यादातर फाइबर निकल जाता है. ऐसे में जूस में मौजूद शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है. बार-बार ऐसा होने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है और शरीर की उन प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करती हैं.

पूरे फल में फाइबर होता है, जो शरीर में शुगर को धीरे-धीरे अवशोषित होने में मदद करता है. इससे ब्लड शुगर और इंसुलिन का स्तर अचानक नहीं बढ़ता है. लेकिन जूस बनाने के दौरान ज्यादातर फाइबर निकल जाता है. ऐसे में जूस में मौजूद शुगर तेजी से शरीर में पहुंचती है. बार-बार ऐसा होने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है और शरीर की उन प्रक्रियाओं पर असर पड़ सकता है, जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करती हैं.

रिसर्च के अनुसार, ज्यादा मात्रा में फ्रुक्टोज, खासकर मीठे ड्रिंक्स के रूप में लेने पर, सबसे पहले लिवर में पहुंचता है. इससे शरीर में फैट बनने की प्रक्रिया बढ़ सकती है, फैटी लिवर, ट्राइग्लिसराइड्स और पेट के आसपास चर्बी जमा होने का खतरा बढ़ सकता है. इससे शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्व सक्रिय हो सकते हैं और ब्लड वेसल्स के सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है. यही कारण आगे चलकर ब्लड प्रेशर बढ़ने से भी जुड़ा माना गया है.

रिसर्च के अनुसार, ज्यादा मात्रा में फ्रुक्टोज, खासकर मीठे ड्रिंक्स के रूप में लेने पर, सबसे पहले लिवर में पहुंचता है. इससे शरीर में फैट बनने की प्रक्रिया बढ़ सकती है, फैटी लिवर, ट्राइग्लिसराइड्स और पेट के आसपास चर्बी जमा होने का खतरा बढ़ सकता है. इससे शरीर में सूजन बढ़ाने वाले तत्व सक्रिय हो सकते हैं और ब्लड वेसल्स के सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है. यही कारण आगे चलकर ब्लड प्रेशर बढ़ने से भी जुड़ा माना गया है.

पूरे फल में फाइबर के साथ-साथ पोटेशियम, एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल भी होते हैं. ये सभी तत्व शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. पोटैशियम शरीर से अतिरिक्त सोडियम बाहर निकालने में मदद करता है और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में सहायक होता है. वहीं पॉलीफेनॉल ब्लड वेसल्स के बेहतर कामकाज में मदद करते हैं. इसी वजह से पूरे फल खाने से वही जोखिम नहीं देखा गया, जो मीठे पेय या जूस के साथ सामने आया.

पूरे फल में फाइबर के साथ-साथ पोटेशियम, एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल भी होते हैं. ये सभी तत्व शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. पोटैशियम शरीर से अतिरिक्त सोडियम बाहर निकालने में मदद करता है और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में सहायक होता है. वहीं पॉलीफेनॉल ब्लड वेसल्स के बेहतर कामकाज में मदद करते हैं. इसी वजह से पूरे फल खाने से वही जोखिम नहीं देखा गया, जो मीठे पेय या जूस के साथ सामने आया.

रिसर्च में बताया गया है कि भारत में पैकेट वाले फ्रूट जूस, मीठे मिल्क ड्रिंक्स और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स बच्चों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, कई पेरेंट्स इन्हें सॉफ्ट ड्रिंक का हेल्दी ऑप्शन मानते हैं, लेकिन 100 प्रतिशत फ्रूट जूस में भी प्राकृतिक शुगर ज्यादा मात्रा में होती है और उसमें पूरे फल जितना फाइबर नहीं होता है. इसलिए इसे रोजाना हेल्थ ड्रिंक की तरह लेने के जगह सीमित मात्रा में ही पीना चाहिए. बच्चों के लिए पानी और दूध बेहतर ऑप्शन माने गए हैं, जबकि स्नैक के रूप में पूरे फल खाने की सलाह दी गई है. रिसर्च के अनुसार, बचपन में बनी अच्छी खानपान की आदतें आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा कम करने में मदद कर सकती हैं.

रिसर्च में बताया गया है कि भारत में पैकेट वाले फ्रूट जूस, मीठे मिल्क ड्रिंक्स और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स बच्चों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, कई पेरेंट्स इन्हें सॉफ्ट ड्रिंक का हेल्दी ऑप्शन मानते हैं, लेकिन 100 प्रतिशत फ्रूट जूस में भी प्राकृतिक शुगर ज्यादा मात्रा में होती है और उसमें पूरे फल जितना फाइबर नहीं होता है. इसलिए इसे रोजाना हेल्थ ड्रिंक की तरह लेने के जगह सीमित मात्रा में ही पीना चाहिए. बच्चों के लिए पानी और दूध बेहतर ऑप्शन माने गए हैं, जबकि स्नैक के रूप में पूरे फल खाने की सलाह दी गई है. रिसर्च के अनुसार, बचपन में बनी अच्छी खानपान की आदतें आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा कम करने में मदद कर सकती हैं.

Published at : 25 Jul 2026 10:21 AM (IST)

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