OECD Foreign Tourist Arrivals Report: कोरोना महामारी के बाद दुनियाभर में पर्यटन इंडस्ट्री तेजी से पटरी पर लौटा है, लेकिन सभी देशों की वापसी एक जैसी नहीं रही. कुछ देशों ने रिकॉर्ड संख्या में विदेशी पर्यटकों का स्वागत किया, जबकि कुछ अब भी महामारी और अन्य चुनौतियों का असर झेल रहे हैं. हालिया आंकड़े बताते हैं कि पर्यटन के मामले में सऊदी अरब और इजरायल की तस्वीर बिल्कुल अलग है. एक ओर सऊदी अरब दुनिया के सबसे तेजी से उभरते पर्यटन केंद्रों में शामिल हो गया है, वहीं दूसरी ओर इसरायल विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में सबसे ज्यादा पिछड़ गया है.
सऊदी अरब का क्या है हाल?
ओईसीडी के आंकड़ों पर आधारित एक रिपोर्ट के अनुसार, 2019 की तुलना में 2025 तक सऊदी अरब में इंटरनेशनल टूरिस्ट की संख्या में 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह सभी सर्वे किए गए देशों में सबसे अधिक है. इसके बाद मोरक्को, मिस्र, ब्राजील और कोलंबिया जैसे देशों का स्थान रहा, जहां भी पर्यटन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली.
क्या सऊदी अरब कर रहा है ग्रो?
सऊदी अरब की इस सफलता के पीछे उसकी महत्वाकांक्षी विजन 2030 योजना को अहम माना जा रहा है. इस योजना के तहत सरकार ने वीजा प्रक्रिया को आसान बनाया, नई इंडस्ट्री उड़ानों की संख्या बढ़ाई और पर्यटन, संस्कृति तथा मनोरंजन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया. धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ अब देश एडवेंचर, ऐतिहासिक स्थलों, समुद्री पर्यटन और मनोरंजन गतिविधियों पर भी जोर दे रहा है.
कितने लोग सऊदी घूमने गए?
पर्यटन मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में सऊदी अरब में कुल 12.3 करोड़ पर्यटकों ने यात्रा की. इनमें करीब 2.93 करोड़ विदेशी पर्यटक शामिल रहे. पर्यटन से देश को 304 अरब सऊदी रियाल की आय हुई, जबकि इस क्षेत्र में 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिला. खास बात यह रही कि पर्यटन क्षेत्र में कार्यरत सऊदी नागरिकों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 47 प्रतिशत तक पहुंच गई.
इजरायल की क्या है स्थिति?
वहीं दूसरी तरफ इजरायल की स्थिति चिंताजनक रही. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में देश में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 2019 की तुलना में 71 प्रतिशत कम रही, जो सर्वे में शामिल सभी देशों में सबसे बड़ी गिरावट है. एक्सपर्ट का मानना है कि अक्टूबर 2023 में शुरू हुए युद्ध के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताओं ने इंटरनेशनल पर्यटकों को इसरायल से दूर कर दिया. इसका सीधा असर वहां के पर्यटन उद्योग पर पड़ा.
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हालांकि 2026 की शुरुआत में ईरान के साथ तनाव के कारण सऊदी अरब के पर्यटन क्षेत्र की रफ्तार में थोड़ी कमी जरूर आई, लेकिन हज और उमराह के लिए लगातार पहुंच रहे लाखों श्रद्धालुओं ने इस असर को काफी हद तक संतुलित रखा. सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक पर्यटन का देश की जीडीपी में योगदान दोगुना होकर 10 प्रतिशत तक पहुंच जाए.
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