मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान ‘तुर्कों की तुर्कायी नहीं चलेगी’ के बाद संभल जिले से एक मामला सामने आया है, जिसमें मुस्लिम समुदाय की पिछड़ी जाति से जुड़े एक व्यक्ति ने तुर्क बिरादरी के कुछ लोगों पर मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ने देने और पुरानी परंपरा बदलने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है.
दरअसल, शुक्रवार (24 जुलाई) को पीड़ित ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है. थाना ऐंचोड़ा कंबोह क्षेत्र के ग्राम माडली समसपुर निवासी मोहम्मद वसीम ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि गांव की करीब 120 वर्ष पुरानी मस्जिद में उनके परिवार द्वारा वर्षों से इमामत की जाती रही है.
तुर्क बिरादरी के लोगों पर आरोप
पीड़ित मोहम्मद वसीम का आरोप है कि तुर्क बिरादरी के कुछ लोगों ने पुरानी व्यवस्था बदलने का प्रयास शुरू कर दिया है. विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को नमाज पढ़ाने से रोकने और गांव छोड़ने की धमकी दी गई. जबकि वर्ष 2024 में इसी विवाद को लेकर पुलिस की मौजूदगी में समझौता हुआ था, जिसके तहत पुरानी व्यवस्था को बरकरार रखने पर सहमति बनी और करीब 18 महीने तक यह व्यवस्था सुचारु रूप से चली, लेकिन बाद में फिर विवाद शुरू हो गया.
डीएम से लगाई गुहार
मोहम्मद वसीम के मुताबिक, वह पिछड़ी जाति (धुने) बिरादरी का है और आरोपी तुर्क बिरादरी के हैं. 3 जुलाई 2026 को जुमे की नमाज के बाद आरोपियों ने उससे कहा कि यदि वे उनकी बताई व्यवस्था के अनुसार नमाज नहीं पढ़ाएंगे तो उन्हें मस्जिद में इमामत नहीं करने दी जाएगी.
नई मस्जिद परम्परा के मुतवल्ली अतीक अहमद, शाने आलम, अतीक अहमद, आमिर, भोलू और हाफिज मारूफ के खिलाफ प्रार्थना पत्र दिया है. पीड़ित ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई करने, पुरानी व्यवस्था बहाल कराने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.
