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BRICS के लिए मरा जा रहा पाकिस्तान! किया आवेदन, एंट्री के लिए भारत की हां जरूरी


पाकिस्तान लंबे समय से BRICS में शामिल होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक उसे इस समूह में जगह नहीं मिल सकी है. पाकिस्तान ने 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए औपचारिक आवेदन किया था. इस समूह में भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शुरुआती प्रमुख सदस्य रहे हैं. बाद में समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश इसमें शामिल हुए.

पाकिस्तान की सदस्यता की राह में सबसे बड़ी राजनीतिक अड़चन भारत की सहमति को माना जाता है. BRICS में नए सदस्यों को शामिल करने का फैसला आम सहमति से होता है. ऐसे में किसी मौजूदा सदस्य की असहमति नए देश की एंट्री को मुश्किल बना सकती है.

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पाकिस्तान क्यों चाहता है BRICS की सदस्यता?

पाकिस्तान की दिलचस्पी BRICS में केवल राजनीतिक वजहों से नहीं है. आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा पाकिस्तान अपने लिए नए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और व्यापारिक रास्ते तलाश रहा है. देश की आर्थिक वृद्धि भी लंबे समय से दबाव में रही है. पाकिस्तान के आर्थिक सर्वे के मुताबिक उसकी GDP ग्रोथ 3.70 फीसदी रही. BRICS में शामिल होने से पाकिस्तान को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का मौका मिल सकता है. इसके अलावा इस्लामाबाद की नजर BRICS से जुड़े न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसे संस्थानों पर भी है, ताकि उसके पास अंतरराष्ट्रीय वित्त जुटाने के ज्यादा विकल्प हों.

न्यू डेवलपमेंट बैंक में पाकिस्तान की दिलचस्पी

निक्केई एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने BRICS के न्यू डेवलपमेंट बैंक में करीब 580 मिलियन डॉलर का निवेश किया है. इसका मकसद वित्तीय विकल्पों को बढ़ाना और विश्व बैंक तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं पर निर्भरता कम करना बताया गया है. पाकिस्तान के लिए यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश लंबे समय से आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा की कमी और कर्ज से जुड़ी चुनौतियों का सामना करता रहा है. BRICS के आर्थिक नेटवर्क का हिस्सा बनने से उसे विकास और निवेश के नए अवसर मिलने की उम्मीद है.

BRICS का बढ़ता प्रभाव पाकिस्तान के लिए बना आकर्षण

BRICS के विस्तार के बाद समूह का वैश्विक प्रभाव भी बढ़ा है. विस्तारित BRICS में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और खरीदने की शक्ति समानता यानी PPP के आधार पर वैश्विक GDP में इसका हिस्सा लगभग 40 फीसदी बताया जाता है. भारत के लिए भी BRICS देशों के साथ आर्थिक संबंध तेजी से बढ़े हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार BRICS देशों को भारत का निर्यात 48.8 फीसदी बढ़कर 64.3 अरब डॉलर से 95.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इससे पता चलता है कि समूह भारत के लिए केवल कूटनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है.

पाकिस्तान ने सदस्यता के लिए क्या कहा था?

नवंबर 2023 में पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने BRICS में शामिल होने की इच्छा की पुष्टि की थी. तत्कालीन विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने BRICS को विकासशील देशों का महत्वपूर्ण समूह बताते हुए कहा था कि पाकिस्तान इसमें शामिल होकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समावेशी बहुपक्षवाद को मजबूत करने में योगदान देना चाहता है. पाकिस्तान का कहना रहा है कि उसके BRICS के ज्यादातर सदस्य देशों के साथ अच्छे संबंध हैं. इसी आधार पर इस्लामाबाद ने उम्मीद जताई थी कि उसकी सदस्यता की मांग पर सकारात्मक विचार किया जाएगा.

रूस और चीन के समर्थन के बावजूद रास्ता आसान नहीं

पाकिस्तान ने अपनी सदस्यता के लिए रूस समेत कुछ प्रमुख देशों से समर्थन जुटाने की कोशिश की है. रूस में पाकिस्तान के राजदूत मुहम्मद खालिद जमाली ने भी बताया था कि इस्लामाबाद BRICS के सदस्य देशों से संपर्क कर रहा है और सदस्यता के लिए समर्थन मांग रहा है. हालांकि रूस और चीन से समर्थन की कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान के लिए सदस्यता हासिल करना आसान नहीं है. BRICS में नए सदस्य को शामिल करने के लिए मौजूदा सदस्यों की सहमति महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में भारत की स्थिति पाकिस्तान की सदस्यता के सवाल पर निर्णायक बन जाती है.

भारत की सहमति क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी तनाव रहा है. ऐसे में BRICS में पाकिस्तान को शामिल करने का फैसला केवल आर्थिक आधार पर नहीं देखा जाता. भारत की सहमति के बिना पाकिस्तान की सदस्यता की प्रक्रिया आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है.

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