साल में दो बार जरूर कराएं डिवर्मिंग: दुधारू पशुओं को साल में कम से कम दो बार डिवर्मिंग की दवा देना जरूरी है. इससे पशुओं के पेट में मौजूद नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को खत्म करने में मदद मिलती है.

बरसात के हरे चारे को लेकर रहें सावधान: बरसात के मौसम में हरे चारे के जरिए कई तरह के छोटे कीड़े और परजीवी पशुओं के पेट में पहुंच सकते हैं. ये धीरे-धीरे उनके लीवर और सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. इसलिए हरा चारा देने के साथ पशुओं की नियमित देखभाल भी जरूरी है.

पेट में कीड़े होने से बिगड़ सकता है पाचन: पशुओं के पेट में परजीवी पहुंचने से उनकी पाचन क्रिया प्रभावित होती है. कई बार उन्हें दस्त होने लगते हैं और गंभीर स्थिति में दस्त के साथ खून भी आने लगता है. इससे पशु कमजोर हो सकता है.

दूध देने की क्षमता पर पड़ता है असर: पेट में कीड़े होने और खून की कमी से पशु की सेहत बिगड़ती है. इसका सीधा असर दूध उत्पादन पर पड़ सकता है. कई बार पशु पहले के मुकाबले कम दूध देने लगता है. इसलिए दूध घटने का एक कारण पेट के कीड़े भी हो सकते हैं.

पशुओं को डॉक्टर की सलाह से दें दवा: बकरियों में फेनबेंडाजोल और एल्बेंडाजोल जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं, बड़े पशुओं के लिए ऑक्सीक्लोजेनाइड जैसी दवा बताई गई है. लेकिन दवा और उसकी मात्रा पशु की उम्र, वजन और सेहत के हिसाब से पशु चिकित्सक से तय कराएं.

डिवर्मिंग में लापरवाही न करें: पशुपालक अक्सर पशुओं को डिवर्मिंग की दवा देना भूल जाते हैं. इसका नुकसान बाद में दूध उत्पादन और पशु की सेहत पर दिखाई देता है. इसलिए समय पर पशु चिकित्सक से जांच करवाएं और उनकी सलाह के अनुसार डिवर्मिंग का समय तय रखें.
Published at : 07 Nov 2026 03:42 PM (IST)
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