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CEC ज्ञानेश कुमार पर यूसुफ पठान का चौंकाने वाला बयान, ‘आवाज सुननी ही चाहिए’


टीएमसी के बागी सांसद यूसुफ पठान ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच चौंकाने वाला बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि इस देश के युवा और नागरिक वही चाहते हैं जो उनके हित में हो और उनकी आवाज को सुना जाना चाहिए. 

इसके अलावा पठान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं पूरे देश का हूं. मैं बहरामपुर का भी हूं. मैं हमेशा बहरामपुर के लिए काम करूंगा. मैं किसी एक व्यक्ति  या ग्रुप का नहीं हूं. मैं पूरे देश का हूं. 

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में दिए इस बयान पर हैरानी इस वजह से भी है, क्योंकि बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी में बड़ी फूट देखने को मिली थी. इसी सिलसिले में यूसुफ पठान समेत कई सांसदों (20) ने अलग गुट बना लिया और मौजूदा एनडीए सरकार को अपना समर्थन जताया था. साथ ही खुद को NCPI में विलय कर लिया था.  

पठान का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब विपक्ष पूरी तरह से एसआईआर और चुनाव धांधली को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली समेत सीईसी की भूमिका पर सवाल उठा रहा है. इसको लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली का आयोजन भी करेगा. इससे पहले चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई में अपनी तरफ से हलफनामा दाखिल कर चुका है. 

बहरामपुर में बस सर्विस शुरू होने पर जताई खुशी

बहरामपुर से सांसद पठान ने कहा है कि मैं इस पहल से बहुत खुश हूं. मैं संबंधित लोगों के लगातार संपर्क में रहा हूं. मरीजों और स्थानीय निवासियों के लिए बेहतर सुविधाओं की जरूरत पर चर्चा करता रहूंगा. उन्होंने सुझाव दिया था कि यहां बस सर्विस शुरू होने से गरीबों को बहुत मदद मिलेगी. यह पहल चार-पांच महीने पहले ही शुरू हो जानी चाहिए थी. भले ही इसमें देरी हुई है, लेकिन मुझे खुशी है कि आखिरकार यह शुरू हो गई है. इससे लोगों को फायदा होगा. 

ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग का कर चुके खंडन

इससे पहले भी ज्ञानेश कुमार को लेकर यूसुफ पठान के साथ एक विवाद जुड़ा था. जिसमें कहा गया था कि उन्होंने ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी, जिस पर उन्होंने खंडन करते हुए कहा था कि ऐसे समय में जब बंगाल, मुर्शिदाबाद, बहरामपुर और पूरे भारत में लोग अपने वोट देने के अधिकार की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो मैं किसी को किसी पुरस्कार देने के लिए क्यों रिकमेंट करूगा.

उन्होंने कहा था कि मैंने ऐसा कोई पत्र नहीं लिखा है. अगर ऐसा पत्र कोई लिखा गया है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए. सबूत पेश करें. वरना इसे फर्जी और मेरे नाम से गलत इस्तेमाल करने की कोशिश मानें. लोक सच जानना चाहते हैं, अफवाहें नहीं. 

 



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