CJP से जुड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे AI-जनित और डीपफेक कंटेंट की निगरानी के लिए विशेष अभियान शुरू किया. महाराष्ट्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कार्यालय के अंतर्गत कार्यरत महाराष्ट्र साइबर राज्य में साइबर अपराधों और साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है.
यह एजेंसी सोशल मीडिया सहित विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार निगरानी रखती है, ताकि गैरकानूनी ऑनलाइन सामग्री, सुनियोजित दुष्प्रचार अभियानों, संदिग्ध साइबर गतिविधियों और ऐसे उभरते डिजिटल खतरों की समय रहते पहचान की जा सके, जो सार्वजनिक व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं.
CJP से जुड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रहे AI-जनित और डीपफेक कंटेंट की निगरानी और कार्रवाई के लिए विशेष अभियान शुरू किया है. इस अभियान में बड़े पैमाने पर ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT), मेटाडेटा जांच, व्यवहार संबंधी विश्लेषण और फोरेंसिक जांच का इस्तेमाल किया गया है.
महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया के एक समन्वित नेटवर्क की पहचान
निगरानी के दौरान महाराष्ट्र साइबर ने सोशल मीडिया अकाउंट्स के एक समन्वित नेटवर्क की पहचान की, जो कथित तौर पर झूठी, भ्रामक और AI-जनित सामग्री प्रसारित कर रहा था. इसका उद्देश्य जनमत को प्रभावित करना, भ्रम पैदा करना, अशांति भड़काना और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ना बताया गया है. तकनीकी विश्लेषण में यह भी सामने आया कि भारत के बाहर से संचालित असामाजिक तत्व, विशेष रूप से पाकिस्तान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों से जुड़े लोग, भारतीय दर्शकों को निशाना बनाने वाले भ्रामक नैरेटिव को बढ़ावा दे रहे थे.
महाराष्ट्र साइबर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चिन्हित सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की और संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की कार्रवाई की. इस निगरानी अभियान के दौरान Instagram, X, Facebook और YouTube सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 429 आपत्तिजनक पोस्ट और हैंडल की पहचान की गई. तकनीकी जांच में सामने आया कि इनमें से लगभग 100 अकाउंट भारत के बाहर से संचालित हो रहे थे.
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140 से अधिक पोस्ट और प्रोफाइल में AI-जनित सामग्री थी शामिल
आगे की जांच में यह भी पाया गया कि 140 से अधिक पोस्ट और प्रोफाइल में AI-जनित या AI की सहायता से तैयार की गई सामग्री शामिल थी. महाराष्ट्र साइबर के अत्याधुनिक ऑडियो-वीडियो फोरेंसिक विश्लेषण उपकरणों के जरिए इस सामग्री की वैज्ञानिक जांच और पुष्टि की गई.
AI-जनित कंटेंट की विस्तृत तकनीकी जांच में डिजिटल तरीके से भीड़ की संख्या बढ़ाकर दिखाना, सिंथेटिक वॉइस जनरेशन, क्लोन किए गए ऑडियो और सार्वजनिक हस्तियों के नाम से गलत तरीके से प्रसारित किए गए छेड़छाड़ किए हुए वीडियो सामने आए. महाराष्ट्र साइबर ने नागरिकों से अपील की है कि संवेदनशील सार्वजनिक घटनाओं से जुड़ी किसी भी जानकारी को सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें. किसी भी संदेश, फोटो या वीडियो को फॉरवर्ड करने से पहले आधिकारिक सरकारी स्रोतों और विश्वसनीय समाचार संस्थानों से उसकी पुष्टि करें.
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