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‘CM विजय को हिंदू धर्म अपनाने के लिए नहीं कहा गया’, मद्रास हाई कोर्ट की बड़ी टिप्पणी


मद्रास हाई कोर्ट ने एक फैसले में साफ किया कि तमिलनाडु के आगमिक मंदिरों में प्रवेश करने के लिए गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को एक लिखित अंडरटेकिंग देनी होगी. कोर्ट ने अपने आदेश में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के मंदिर दौरों का उदाहरण दिया. जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस पी मुरूगन की बेंच ने कहा कि गैर-हिंदुओं को मंदिर के गर्भगृह या कोडीमरम (ध्वज स्तंभ) के आगे जाने से पहले यह घोषणा करनी होगी कि वे मंदिर के देवता में आस्था रखते हैं, हिंदू धर्म और मंदिर के रीति-रिवाजों का पालन करेंगे.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था किसी को धर्म बदलने के लिए नहीं, बल्कि मंदिर की परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए है. सीएम विजय का जिक्र करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, ‘मुख्यमंत्री, जो ईसाई धर्म को मानते हैं, उनसे हिंदू धर्म अपनाने के लिए नहीं कहा गया था. उनसे केवल देवता के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त करने का अनुरोध किया गया था. यही सबको साथ लेकर चलने वाली सोच है.’

मुख्यमंत्री विजय ने सितंबर में मदुरै के प्रसिद्ध मीनाक्षी सुंदरेश्वरर मंदिर में प्रवेश से पहले इसी तरह का एक फेथ अंडरटेकिंग दिया था, जिसके बाद उन्हें मंदिर में दर्शन की अनुमति मिली थी. इससे पहले अप्रैल में भी उन्होंने तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर में इसी प्रक्रिया का पालन किया था. हाई कोर्ट के 2024 के एक पिछले आदेश के अनुसार, गैर-हिंदुओं को मंदिर के रजिस्टर में अपनी आस्था की घोषणा दर्ज करानी होती है.

मद्रास हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी मदुरै के निवासी थंगम वेंकटेश के ओर से दायर दायर पीआईएल पर सुनवाई के दौरान की. याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि आगमिक मंदिरों के मंडप और कोडीमरम के आगे गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए और मंदिर प्रवेश के नियमों को सख्ती से लागू किया जाए.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कुछ हालिया घटनाओं का भी संज्ञान लिया, जहां बिना नियम पालन के गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर विवाद हुआ था. इसमें तिरुवन्नामलाई के अरुणाचलेश्वर मंदिर और मदुरै मीनाक्षी मंदिर के कुंभाभिषेकम समारोह के दौरान हुई घटनाएं शामिल थीं. कोर्ट ने मंदिर प्रवेश में चमचागिरी और दिखावे की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक या व्यक्तिगत वजहों से सदियों पुरानी मंदिर परंपराओं को ताक पर नहीं रखा जा सकता.

मद्रास हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका यह फैसला केवल आगमिक मंदिरों पर ही लागू होगा. शिरडी साईं बाबा मंदिर जैसे पूजा स्थलों पर यह नियम लागू नहीं होगा, जहां सभी धर्मों के लोग पूजा-अर्चना के लिए आते हैं. कोर्ट ने कहा कि संबंधित मंदिर प्रशासन अपनी आवश्यकता के अनुसार इस शपथ-पत्र का फॉर्मेट तैयार करेंगे.



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