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 Crops For Desert Farming: रेगिस्तान में किन फसलों की खेती देगी मुनाफा, यहां जान लीजिए


 Crops For Desert Farming: जब रेगिस्तान का नाम आता है तो बस चारों ओर रेत और बंजर जमीन का ही ख्याल आता है. ऐसे में आम तौर पर लोग सोचते हैं कि ऐसी रेतीली और कम पानी वाली जगह पर खेती करना नामुमकिन है. लेकिन आज की आधुनिक तकनीक और कृषि वैज्ञानिकों की नई खोजों ने इस सोच को पूरी तरह से बदल दिया है. अगर सही फसलों का चुनाव किया जाए, तो रेगिस्तान की तपती रेत में भी बंपर पैदावार ली जा सकती है. बस आपको सही फसल के किस्म का चुनाव करना होता है. जिसके बाद उसकी अच्छी देख-रेख और वक्त पर सही खाद-दवाई को देकर आप अच्छा मुनाफा कमा सकते है. 

बाजरा और ग्वार

रेगिस्तानी इलाकों जैसे पश्चिमी राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्से के लिए बाजरा सबसे बेहतरीन फसल मानी जाती है. क्योंकि इसे बहुत ही कम पानी की जरूरत होती है और यह तेज धूप को आसानी से बर्दाश्त कर लेता है. इसके अलावा ग्वार भी रेगिस्तान के लिए एक अच्छी फसल मानी जाती है. साथ ही इसकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत ज्यादा है. ग्वार से निकलने वाले ग्वार गम का इस्तेमाल टेक्सटाइल, फूड और पेट्रोलियम इंडस्ट्री में होता है, जिससे बाजार में किसानों को इसके बहुत अच्छे दाम मिल जाते हैं. 

एलोवेरा और अश्वगंधा 

रेगिस्तानी इलाकों में एलोवेरा की खेती करना एक सोने के अंडे देने वाली मुर्गी के बराबर माना जाता है.  इसे एक बार लगाने के बाद सालों तक पानी की बेहद कम जरूरत होती है और इसे जानवर भी नहीं खाते. कॉस्मेटिक और फार्मा कंपनियों में हमेशा एलोवेरा जेल की भारी डिमांड होती है. जिससे किसान मालामाल हो सकते हैं. ऐसे ही अश्वगंधा भी एक बेहतरीन विकल्प होता है, यह कम नमी में भी काफी अच्छी पैदावार देती है. इसकी खेती करने से किसान भारी मुनाफा कमा सकते हैं. 

बेर, अनार और खजूर

सूखे इलाकों में पारंपरिक खेती के बजाय बागवानी पर फोकस करना समझदारी भरा काम माना जाता है. थार के रेगिस्तान में इजरायली तकनीक से अब बेहतरीन खजूर उगाए जा सकते है. क्योंकि खजूर के पौधे को बढ़ने के लिए तेज गर्मी की जरूरत होती है. जो उनको रेगिस्तान में आसानी से मिल जाते है. ऐसे ही बेर और अनार जैसे फलों के पौधों की जड़ें काफी गहराई तक जाती हैं, जिससे ये जमीन के अंदर से नमी सोख लेते हैं. साथ ही बाजार में इनकी कीमत हमेशा ऊंची रहती है, जिससे प्रति एकड़ लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया जाता है. 

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सरसों और तारामीरा

कम पानी वाले क्षेत्रों में ठंड के मौसम में सरसों और तारामीरा की खेती काफी अच्छी रहती है. खासकर तारामीरा एक ऐसी फसल है, जो बिना सिंचाई के भी सिर्फ ओस की नमी से पककर तैयार हो जाती है. इसके तेल का इस्तेमाल उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है. जिससे बाजार में साल भर इसकी मांग बनी रहती है.

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