दिल्ली के सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हजारों छात्रों के सामने रहने की जगह और सुरक्षा से जुड़ी मुश्किलों को एक बार फिर उजागर कर दिया है. यूनिवर्सिटी के पास सत्य निकेतन पीजी हादसे में सात लोगों की जान चली गई. इस घटना के बाद डीयू के उन छात्रों की भी चिंता सामने आई, जो कॉलेज हॉस्टल में जगह नहीं मिलने के कारण मजबूरी में महंगे और असुरक्षित पीजी या किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं.
दरअसल, हर साल हजारों छात्रों को डीयू में एडमिशन मिलने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती रहने की जगह की खड़ी हो जाती है. डीयू के ज्यादातर कॉलेजों में हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं है और जिन कॉलेजों में हॉस्टल है, वहां भी सीटों की संख्या छात्रों की तुलना में बहुत कम है. ऐसे में दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले हजारों छात्रों को पीजी, प्राइवेट हॉस्टल या किराए के मकान का सहारा लेना पड़ता है.
DU के 91 कॉलेज में सिर्फ 20 के पास हॉस्टल
दिल्ली यूनिवर्सिटी में कुल 91 कॉलेज है, लेकिन इनमें से सिर्फ 20 कॉलेज में हॉस्टल की सुविधा है. यानी 71 कॉलेज ऐसे हैं, जहां छात्रों के लिए कॉलेज स्तर पर हॉस्टल उपलब्ध नहीं है. यूनिवर्सिटी के नॉर्थ और साउथ कैंपस में भी हॉस्टल की सुविधा मौजूद है, लेकिन कुल मिलाकर करीब 7000 ही हॉस्टल सीटें हैं. यह संख्या डीयू में पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या के मुकाबले बहुत कम है. यूनिवर्सिटी की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार यहां करीब 2.1 लाख अंडरग्रेजुएट छात्र और 34,520 पोस्ट ग्रेजुएट छात्र है, जिनमें पीएचडी स्कॉलर भी शामिल है. इस तरह डीयू में कुल छात्र संख्या करीब 2.5 लाख पहुंचती है.
2026-27 में करीब 71,600 नए UG छात्र
छात्रों की संख्या और हॉस्टल सीटों के बीच अंतर एडमिशन के साथ ही जरूरी हो जाता है. 2026-27 एडमिशन सेशन में डीयू करीब 71,600 अंडर ग्रेजुएट छात्रों को एडमिशन दे रहा है. कॉलेजों के अनुमान के अनुसार यूनिवर्सिटी के करीब आधे छात्र दिल्ली से बाहर के इलाकों से आते हैं. ऐसे छात्रों के लिए एडमिशन मिलने के बाद रहने की व्यवस्था करना जरूरी हो जाता है. लेकिन सीमित हॉस्टल सीटों के कारण हर छात्र को कैंपस में कमरा मिलना संभव नहीं है.
हॉस्टल वाले कॉलेजों में भी सीटों की भारी कमी
जिन कॉलेजों में हॉस्टल मौजूद है, वहां भी स्थिति बहुत अलग नहीं है. उदाहरण के तौर पर मिरांडा हाउस में करीब 5,375 छात्र हैं, जबकि हॉस्टल में लगभग 370 छात्रों के रहने की क्षमता है. 2026-27 में फर्स्ट ईयर के छात्रों के लिए सिर्फ करीब 90 हॉस्टल सीटें उपलब्ध है.
इसी तरह श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में लगभग 4,600 छात्र है, लेकिन हॉस्टल की क्षमता केवल 150 छात्रों की है. इनमें से फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स के लिए सिर्फ 50 सीटें उपलब्ध है. वही मिरांडा हाउस, किरोड़ी मल कॉलेज, हिंदू कॉलेज, एसआरसीसी और लेडी श्री राम कॉलेज को देखें तो करीब 24,350 छात्रों के मुकाबले हॉस्टल की कुल क्षमता 1,140 है. यानी इन कॉलेज में उनके हॉस्टल मिलाकर कुल छात्र संख्या के करीब 4.7 फीसदी को ही जगह दे पाते हैं.
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हॉस्टल की कमी कोई नई समस्या नहीं
डीयू में हॉस्टल की कमी कोई नई स्थिति नहीं है. नवंबर 2016 में राज्यसभा में दिए गए एक जवाब में यूनिवर्सिटी के हवाले से बताया गया था कि डीयू में 19 हॉस्टल थे, जिनकी कुल क्षमता 3,580 छात्रों की थी. कॉलेज की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले आवास को शामिल करने पर यह संख्या करीब 6000 सीटों तक पहुंचती थी. उस समय डीयू हर साल कम से कम 60 हजार छात्रों को एडमिशन दे रहा था. वहीं करीब एक दशक बाद भी छात्रों की संख्या और हॉस्टल क्षमता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है.
हॉस्टल नहीं मिलने पर PG और किराए का सहारा
कैंपस में जगह नहीं मिलने के बाद छात्रों का रुख प्राइवेट आवास की और जाता है. नॉर्थ कैंपस के आसपास विजयनगर और मिलका गंज, जबकि साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र पीजी, प्राइवेट हॉस्टल और किराए के फ्लैट तलाशते हैं. हालांकि निजी आवास में भी छात्रों के सामने कई परेशानियां रहती है. ज्यादा किराया, सीमित जगह और कई बार खराब रखरखाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले छात्रों के लिए एडमिशन के बाद रहने की व्यवस्था करना इसलिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
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