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Edible Oil Imports: विदेशों से हर साल कितना खाद्य तेल खरीदता है भारत, क्या महंगी होने वाली है आपकी थाली?


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  • कमजोर रुपया और वैश्विक कीमतें बढ़ा रही हैं आयात की लागत.

Edible Oil Imports: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव की वजह से खाद्य तेल की कीमतों में भी उछाल देखने को मिला है. भारत अपने खाने के तेल की जरूरत पूरी करने के लिए बड़े पैमाने पर इंपोर्ट पर निर्भर है. देश की कुल जरूरतों का लगभग 60% हिस्सा विदेशी बाजारों से आता है. जैसे-जैसे दुनिया भर में खाने के तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और इंपोर्ट बिल तेजी से बढ़ रहा है अब लोगों के घरों के बजट और खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बढ़ती कीमतों के बीच नागरिकों से खाने के तेल का इस्तेमाल करने की अपील की थी. 

भारत ने कितना तेल आयात किया? 

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा जारी हाल के आंकड़ों के मुताबिक भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 166.51 लाख टन खाने का तेल इंपोर्ट किया. इस दौरान देश ने खाने के तेल के आयात पर लगभग 19.35 बिलियन डॉलर खर्च किए. इंपोर्ट पर बढ़ती निर्भरता एक बड़ी आर्थिक समस्या बन गई है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत अपनी घरेलू पैदावार की तुलना में कहीं ज्यादा खाने के तेल का इस्तेमाल करता है.

आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है 

हाल के महीनों में आयात का बोझ तेजी से बढ़ा है. मौजूदा तेल वर्ष के पहले 6 महीना में ही नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भारत का खाने के तेल का आयात बिल लगभग 19% की बढ़ोतरी के साथ ₹87,000 करोड़ के पार पहुंच गया.  यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल और घरों व उद्योगों में इस्तेमाल के लिए आयातित खाने के तेल पर भारत की लगातार निर्भरता दोनों को दर्शाती है.

भारत का तेल इंपोर्ट 

भारत तेल के प्रकार के आधार पर कई देशों से खाने का तेल इंपोर्ट करता है. पाम तेल मुख्य रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात किया जाता है. सोयाबीन तेल ज्यादातर अर्जेंटीना और ब्राजील से आता है. इसी के साथ सूरजमुखी तेल मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन से आयात किया जाता है. 

कमजोर रुपया आयात को और महंगा बना रहा 

एक और बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का कमजोर होना है. क्योंकि खाने के तेल के इंपोर्ट का भुगतान डॉलर में किया जाता है इस वजह से रुपया कमजोर होने से इंपोर्ट की कुल लागत बढ़ जाती है. भले ही वैश्विक कीमतें स्थिर रहें. 

किन चीजों पर पड़ सकता है असर? 

 महंगे खाने के तेल का असर सिर्फ घरों में खाना पकाने तक ही सीमित नहीं है. बिस्कुट, नमकीन, पैकेट वाले स्नैक्स, साबुन और प्रोसेस्ड फूड जैसे कई एफएमसीजी उत्पादों को बनाने में भी खाने का तेल का ही इस्तेमाल होता है. इस वजह से तेल की बढ़ती कीमतें कई उपभोक्ता उत्पादों में महंगाई बढ़ाने में योगदान दे सकती हैं.

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