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Explained: टॉप टैलेंट नहीं, तोड़ दें ब्रिटेन का ख्वाब! नया माइग्रेशन प्लान और भारतीयों पर असर क्या?


ब्रिटेन की सरकार ने 2026 के अंत में अपनी लीगल माइग्रेशन नीति में एक बड़ा बदलाव किया है. गृह मंत्री शबाना महमूद ने संसद में जो नया प्लान पेश किया, उसका सीधा मतलब है कि ब्रिटेन में बसना अब कोई ‘अधिकार’ नहीं, बल्कि एक ‘विशेषाधिकार’ है, जिसे ‘कमाना’ पड़ेगा. पहले जहां ज्यादातर वर्क वीजा धारकों को 5 साल बाद परमानेंट रेजिडेंस (ILR) मिल जाता था, अब डिफॉल्ट रूप से यह इंतजार 10 साल का होगा.

तो एक्सप्लेनर में जानते हैं कि ब्रिटेन का लीगल माइग्रेशन प्लान क्या है और भारतीयों पर कितना असर पड़ेगा…

‘अर्न्ड सेटलमेंट’ क्या है?

यह प्लान का सबसे बड़ा और विवादास्पद हिस्सा है. पहले ब्रिटेन में वर्क वीजा पर जाने वाले ज्यादातर लोग 5 साल पूरे होने पर परमानेंट रेजिडेंस के लिए अप्लाई कर सकते थे. नए नियम के तहत, डिफॉल्ट समय 10 साल कर दिया गया है. यह सिर्फ 10 साल का इंतजार नहीं है. यह एक पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम है, जहां कुछ चीजें आपका समय बढ़ा सकती हैं और कुछ घटा सकती हैं.

सरकार का तर्क है कि इससे वही लोग ब्रिटेन में बसेंगे जो देश की अर्थव्यवस्था और समाज में सच में योगदान दे रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि यह ‘कम आय वाले’ लेकिन जरूरी काम करने वाले लोगों के लिए बहुत बड़ा झटका है. इसी विरोध के चलते सरकार को केयर वर्कर्स को कुछ राहत देने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे करीब 3 लाख लोग अभी भी 5 साल में सेटलमेंट के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

स्किल्ड वर्कर वीजा: सैलरी और स्किल की नई सीमा

अगर आप वर्क वीजा पर ब्रिटेन जाना चाहते हैं, तो अब रास्ता पहले से कहीं मुश्किल है:

  • सैलरी थ्रेशोल्ड: जुलाई 2025 से नए अप्लिकेंट्स के लिए सालाना सैलरी कम से कम 41,700 यूरो होनी चाहिए. कुछ खास मामलों में यह कम हो सकती है, लेकिन सामान्य नियम यही है.
  • स्किल लेवल: अब सिर्फ RQF 6 (यानी ग्रेजुएट या बैचलर डिग्री लेवल) या उससे ऊपर की जॉब्स के लिए ही स्पॉन्सरशिप मिल सकती है. पहले RQF 3 (A-level) लेवल की जॉब्स भी क्वालिफाई करती थीं, लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है.
  • डिपेंडेंट्स: स्किल्ड वर्कर वीजा पर आप अपने पार्टनर और बच्चों को ला सकते हैं, लेकिन सिर्फ तब जब आपकी जॉब RQF 6 या उससे ऊपर हो. कम स्किल वाली जॉब्स पर अब नए डिपेंडेंट्स नहीं आ सकते.

ग्रेजुएट वीजा: ‘हाई-कंप्लायंस’ यूनिवर्सिटीज के लिए दो साल, बाकी के लिए क्या?

यह प्लान का सबसे दिलचस्प हिस्सा है, क्योंकि इसमें सरकार ने थोड़ा पीछे हटते हुए दो लेवल वाला सिस्टम बना दिया है. पहले सभी इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को ग्रेजुएशन के बाद ब्रिटेन में काम करने के लिए 2 साल का ग्रेजुएट वीजा मिलता था.

नए नियमों के मुताबिक, 1 जनवरी 2027 से यह घटकर 18 महीने होने वाला था. बजट 2026 में सरकार ने ऐलान किया कि जो स्टूडेंट्स ‘हाई-कंप्लायंस’ यूनिवर्सिटीज से पढ़ाई करेंगे और जिनके ‘बेहतर लेबर मार्केट आउटकम’ होंगे, उनके लिए यह वीजा 2 साल का ही रहेगा.

अगर आप किसी ‘अच्छी’ यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करते हैं, तो आपको 2 साल मिलेंगे, वरना सिर्फ 18 महीने. अभी यह साफ नहीं है कि ‘हाई-कंप्लायंस’ और ‘स्ट्रॉन्ग लेबर मार्केट आउटकम’ को कैसे मापा जाएगा.

केयर वर्कर्स और परिवार: कुछ राहत, कुछ सख्ती

  • केयर वर्कर्स: सरकार ने शुरू में सोशल केयर वीजा को पूरी तरह बंद करने और सेटलमेंट का इंतजार 15 साल तक बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन विरोध के बाद इसमें ढील दी गई है. अब नए अप्लिकेंट्स के लिए रास्ता बंद है, लेकिन जो पहले से ब्रिटेन में हैं, वे 2028 तक वीजा बढ़ा सकते हैं. कुछ शर्तों के साथ 5 साल में सेटलमेंट के लिए अप्लाई कर सकते हैं.
  • इंग्लिश लेवल: 8 जनवरी 2026 से नए स्किल्ड वर्कर, स्केल-अप और HPI वीजा अप्लिकेंट्स के लिए इंग्लिश का लेवल B1 से बढ़ाकर B2 कर दिया गया है.
  • नए सेफ एंड लीगल रूट्स: सरकार शरणार्थियों के लिए नए कानूनी रास्ते खोल रही है, जिनमें रिफ्यूजी स्टूडेंट्स और वर्कर्स के लिए अलग रूट्स और कम्युनिटी स्पॉन्सरशिप शामिल हैं. हर साल संसद में इनकी एक लिमिट तय की जाएगी.

ब्रिटेन में टॉप टैलेंट के अलावा दरवाजे संकरे

ब्रिटेन का यह पूरा प्लान एक साफ संदेश देता है कि देश को सिर्फ ‘हाई-स्किल्ड, हाई-अर्निंग’ और ‘स्ट्रेटेजिक’ टैलेंट चाहिए. जो लोग कम स्किल वाली, कम तनख्वाह वाली नौकरियां करते हैं, उनके लिए ब्रिटेन का दरवाजा तेजी से बंद हो रहा है.

इसका सीधा असर भारतीयों पर भी पड़ेगा. स्टूडेंट्स को अब यूनिवर्सिटी चुनते समय यह देखना होगा कि वह ‘हाई-कंप्लायंस’ लिस्ट में है या नहीं, क्योंकि इससे उनके पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा की अवधि तय होगी. स्किल्ड वर्कर्स के लिए 41,700 यूरो की सैलरी और RQF 6 की शर्त पहले से ही मुश्किलें बढ़ा चुकी है.

जो लोग लंबे समय से ब्रिटेन में हैं और परमानेंट रेजिडेंस का सपना देख रहे थे, उनके लिए 10 साल का इंतजार एक लंबी और मुश्किल राह बन गया है. सरकार का कहना है कि यह कंट्रोल बढ़ाने के लिए जरूरी है, लेकिन आलोचक इसे ‘अमीरों के लिए खुला, गरीबों के लिए बंद’ दरवाजा कह रहे हैं.



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