कैथोलिक चर्च के इतिहास में यह पल पहले कभी नहीं आया. 30 अक्टूबर 2026 को वेटिकन ने पुष्टि की कि पोप लियो XIV ने अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में मेल-इन बैलेट के जरिए अपना वोट डाल दिया है. यह किसी भी सिटिंग पोप के किसी अमेरिकी आम चुनाव में वोट डालने का पहला मामला है. यानी 2,000 साल के पोपशाही इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है. लियो XIV का रॉबर्ट फ्रांसिस प्रीवोस्ट है और वो शिकागो में पैदा हुए. वे मई 2025 में पोप चुने जाने वाले पहले अमेरिकी नागरिक हैं.
पोप का यह कदम ऐसे समय आया है जब उनके और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आप्रवासन और ईरान युद्ध को लेकर तीखी टकराव की खबरें सामने आ रही हैं…
पोप अमेरिकी चुनाव में वोट कैसे डाल सकते हैं?
यह सवाल बिल्कुल जायज है, क्योंकि पोप एक विदेशी संप्रभु राज्य (वेटिकन सिटी) के प्रमुख हैं. इसका जवाब कानूनी रूप से बहुत साफ है:
1. पोप ने अमेरिकी नागरिकता नहीं छोड़ी
पोप बनने से किसी व्यक्ति की अमेरिकी नागरिकता अपने आप खत्म नहीं हो जाती. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों (Afroyim v. Rusk, 1967 और Vance v. Terrazas, 1980) के मुताबिक, सरकार किसी की मर्जी के बिना नागरिकता नहीं छीन सकती. नागरिकता छोड़ने के लिए अमेरिकी कांसुलर अधिकारी के सामने औपचारिक रूप से त्यागपत्र देना पड़ता है, जो पोप ने नहीं किया है.
2. इलिनोइस के कानून में मेल-इन वोटिंग की इजाजत
पोप लियो XIV इलिनोइस के विल काउंटी में रजिस्टर्ड हैं. राज्य का कानून किसी भी रजिस्टर्ड वोटर को बिना कारण बताए मेल-इन बैलेट का अनुरोध करने की अनुमति देता है. उन्होंने 3 अक्टूबर को अपने जन्म के नाम से बैलेट का अनुरोध किया था.
3. विदेश में रहने वाले अमेरिकियों के लिए संघीय कानून
यूनिफॉर्म्ड एंड ओवरसीज सिटीजन्स एबसेंटी वोटिंग एक्ट (UOCAVA) कानून विदेश में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों के संघीय पदों के लिए मतदान के अधिकार की रक्षा करता है. पोप ने पहले भी पेरू और वेटिकन में रहते हुए 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मेल-इन वोट डाला था.
4. कैनन लॉ में कोई रोक नहीं
कैथोलिक चर्च के कानून के मुताबिक, पादरियों को सक्रिय रूप से राजनीतिक दलों में शामिल होने से रोका गया है, लेकिन वोट डालने पर कोई रोक नहीं है. पोप ने अपना वोट किसे दिया, यह कभी सार्वजनिक नहीं होगा. अमेरिका में मतदान गोपनीय होता है.
सिर्फ ‘पहली बार’ नहीं, एक नियमित मतदाता
पोप लियो XIV के लिए यह वोट डालना कोई नई बात नहीं है. वे पहले भी कई चुनावों में वोट डाल चुके हैं:
- 2000 के बाद से उन्होंने कम से कम 10 आम चुनावों में वोट डाला है.
- उन्होंने 2008 और 2010 के डेमोक्रेटिक प्राइमरी में और 2012, 2014 और 2016 के रिपब्लिकन प्राइमरी में वोट डाला था.
- आम चुनावों में उन्होंने 2012, 2014, 2018 और 2024 में वोट डाला, लेकिन 2020 के राष्ट्रपति चुनाव और 2022 के मिडटर्म्स में उन्होंने वोट नहीं डाला.
इलिनोइस में पार्टी रजिस्ट्रेशन नहीं होता, इसलिए किसी प्राइमरी में एक पार्टी का बैलेट चुनना उस पार्टी से औपचारिक जुड़ाव नहीं माना जाता. यानी उनके डेमोक्रेटिक या रिपब्लिकन बैलेट चुनने को राजनीतिक रुख के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
ट्रंप से टकराव: सिर्फ वोट नहीं, बयानों का भी मोर्चा
पोप का यह कदम ऐसे समय आया है जब उनके और ट्रंप प्रशासन के बीच मतभेद खुले तौर पर सामने आ चुके हैं. दोनों में मुख्य टकराव:
- आप्रवासन: पोप ने ट्रंप प्रशासन की सख्त आप्रवासन नीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है.
- ईरान युद्ध: पोप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को रोकने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील की है.
- ट्रंप का पलटवार: ट्रंप ने पोप को अपराध के मामले में ‘कमजोर’ और विदेश नीति में ‘भयानक’ बताया है.
वेटिकन ने साफ कहा है कि पोप का वोट डालना किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र में भाग लेने का उनका ‘अधिकार और कर्तव्य’ है.
यह वोट सिर्फ एक बैलेट नहीं, एक ऐतिहासिक बयान
पोप लियो XIV का यह कदम तीन कारणों से ऐतिहासिक है:
- 2,000 साल पुरानी परंपरा टूटी है जिसमें पोप राजनीतिक प्रक्रिया से दूर रहते थे.
- इसने यह साफ कर दिया कि पोप होने का मतलब अमेरिकी नागरिकता के अधिकार खोना नहीं है.
- यह ट्रंप प्रशासन के साथ चल रहे टकराव के बीच आया है, जिससे इसकी राजनीतिक गूंज और भी तेज हो गई है.
हालांकि, इसका असर सीमित भी है. मतदान गोपनीय है, इसलिए किसी को नहीं पता कि पोप ने किसे वोट दिया. लेकिन जिस तरह उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस अधिकार का इस्तेमाल किया, उसने यह संदेश दिया है कि धार्मिक नेतृत्व और नागरिक भागीदारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं. यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सबक है.
