फ्रांस की राजधानी पेरिस में FATF की चार दिवसीय प्लेनरी बैठक के बाद भी फिलहाल पाकिस्तान में संचालित वैश्विक आतंकी संगठनों के डिजिटल माध्यमों से की जा रही फंडिंग को लेकर FATF ने पाकिस्तान पर कोई कार्रवाई नहीं की है. साथ ही FATF के प्रमुख गिल्स थॉम्पसन से जब एबीपी न्यूज ने पूछा कि क्या FATF को पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के ऑनलाइन चंदा इकट्ठा करने की जानकारी है या फिर भारत ने ये मुद्दा FATF के सामने उठाया तो एगिल्स थॉम्पसन ने बैठक की गोपनीयता का हवाला देते हुए उसकी जानकारी साझा करने में असमर्थता जताई.
पाकिस्तान के मुद्दे पर FATF के प्रमुख गिल्स थॉम्पसन ने कहा की अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था और इसके बाद से पाकिस्तान के साथ FATF के एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) के माध्यम से बातचीत की जा रही है और मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है.
2030 की प्लेनरी में चर्चा होगी
जिस APG के मूल्यांकन का FATF के प्रमुख गिल्स थॉम्पसन ने हवाला दिया है, एबीपी न्यूज के द्वारा देखे गए उसके दस्तावेजो के मुताबिक 31 मार्च 2029 तक ये ग्रुप पाकिस्तान का मूल्यांकन पूरा करके रिपोर्ट जमा करेगा और साल 2030 की प्लेनरी में इस मूल्यांकन रिपोर्ट पर चर्चा करके FATF कुछ फैसला लेगी.
391 करोड़ इकट्ठा किए
पिछले साल सबसे पहले एबीपी न्यूज ने खुलासा किया था कि किस तरह से आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ऑनलाइन माध्यम से पाकिस्तान में 391 करोड़ रुपयों का चंदा इकट्ठा कर रही हैच साथ ही इसी चंदे और पाकिस्तान की सरकार की मदद के माध्यम से ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त अपने हेडक्वार्टर का पुनर्मिर्माण कर रही है जो कि अब पूरा हो चुका है. ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि FATF ने फिलहाल अगले 3-4 साल के लिए पाकिस्तान की तरफ अपनी आंख मूंद ली है.
तब तक पाकिस्तान आतंकी संगठनों के संचालन से लेकर उसकी खुलेआम फंडिंग तक चलते रहने देगा और फिर 2029 आते आते फिर से 2019-20 की तरह कागज पर सभी आतंकी कैंपों और हेडक्वार्टरों को अधिग्रहित कर लेगा और खुले घूम रहे आतंकी मसूद अजहर, तल्हा अल सैफ, अम्मार अल्वी, मुफ़्ती रऊफ असगर को कागज पर गिरफ़्तार या फिर भगोड़ा दिखा देगा.
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