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Ganesh Murti Buying 2026: पिठोरी अमावस्या खत्म, अब गणपति की मूर्ति घर लाने में कोई रोक है? जानें सही नियम


Ganesh Chaturthi 2026: पिठोरी अमावस्या के कारण जिन लोगों ने गणपति की मूर्ति खरीदना टाल दिया था, वे अब बप्पा को घर ला सकते हैं. 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे अमावस्या समाप्त हो चुकी है और भाद्रपद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो गई है.

हालांकि, मूर्ति घर लाते समय एक बात ध्यान रखें कि गणपति का आगमन और उनकी विधिवत स्थापना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं.

अब गणपति की मूर्ति खरीद सकते हैं?

पंचांग के अनुसार 11 सितंबर 2026 को अमावस्या तिथि सुबह 8:56 बजे समाप्त हो गई. इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा आरंभ हो चुकी है. इसलिए जिन परिवारों में अमावस्या पर नई या मांगलिक वस्तु घर नहीं लाने की परंपरा है, वे अब गणपति की मूर्ति खरीदकर घर ला सकते हैं.

यहां यह भी समझना जरूरी है कि अमावस्या पर मूर्ति खरीदने की मनाही कोई सर्वमान्य नियम नहीं है. अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इससे जुड़ी परंपराएं बदलती हैं. इसलिए जो लोग 10 सितंबर या आज सुबह मूर्ति खरीद चुके हैं, उन्हें डरने या मूर्ति बदलने की जरूरत नहीं है.

मूर्ति खरीदना, घर लाना और स्थापना एक नहीं

गणेशोत्सव की तैयारी के दौरान सबसे अधिक भ्रम इन्हीं तीन बातों को लेकर होता है.

  • मूर्ति खरीदना: दुकान या कारीगर से अपनी पसंद की प्रतिमा चुनना और उसका भुगतान करना.
  • गणपति को घर लाना: प्रतिमा को सम्मान और सावधानी के साथ घर तक लेकर आना.
  • गणपति स्थापना: निश्चित स्थान पर चौकी सजाकर संकल्प, आवाहन और विधिवत पूजा शुरू करना.

इसलिए गणेश चतुर्थी से दो या तीन दिन पहले मूर्ति घर लाने में कोई समस्या नहीं है. मुख्य पूजा और उत्सव का संकल्प गणेश चतुर्थी पर स्थापना के साथ आरंभ किया जाएगा.

अभी घर लाएं तो बप्पा को कहां रखें?

गणपति की मूर्ति को घर लाने के बाद सीधे जमीन पर रखने से बचें. किसी साफ पाटे, मेज या ऊंची चौकी पर नया अथवा स्वच्छ कपड़ा बिछाकर मूर्ति रख सकते हैं.

अगर प्रतिमा मिट्टी की बनी है तो उसे नमी, पानी और तेज धूप से बचाना जरूरी है. मूर्ति को ऐसी जगह न रखें जहां बच्चों, पालतू जानवरों या सामान के टकराने से नुकसान होने की आशंका हो.

गणेश चतुर्थी से पहले प्रतिमा को पूजा की चौकी पर रखना गलत नहीं है, लेकिन विधिवत संकल्प, आवाहन, भोग और आरती निर्धारित स्थापना के समय से ही आरंभ करें. सामान्य रूप से बप्पा को प्रणाम किया जा सकता है.

क्या मूर्ति का चेहरा ढककर रखना जरूरी है?

गणपति का चेहरा कपड़े से ढककर घर लाने की परंपरा कई परिवारों और क्षेत्रों में है. इसका उद्देश्य प्रतिमा को सुरक्षित रखना और स्थापना तक औपचारिक दर्शन न करना माना जाता है. लेकिन इसे सभी के लिए अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं कहा जा सकता.

अगर आपके परिवार में चेहरा ढककर गणपति लाने की परंपरा है तो उसका पालन करें. अन्यथा मूर्ति को साफ कपड़े या सुरक्षित पैकिंग में सम्मानपूर्वक घर लाना पर्याप्त है.

गणेश चतुर्थी कब है?

साल 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार, 14 सितंबर को मनाई जाएगी. उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे समाप्त होगी. दिल्ली के लिए गणपति स्थापना और मध्याह्न पूजा का समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है. शहर बदलने पर मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है.

मूर्ति खरीदते समय यह भी देख लें

गणपति की प्रतिमा खरीदने की जल्दी में केवल रंग और सजावट न देखें. मूर्ति कहीं से टूटी या चटकी हुई नहीं होनी चाहिए. हाथ, सूंड, मुकुट और मूषक की आकृति ध्यान से जांच लें. घर में विसर्जन करना है तो प्राकृतिक मिट्टी और पानी में घुलने वाले रंगों से बनी प्रतिमा बेहतर विकल्प रहेगी.

अब क्या करना सही रहेगा?

पिठोरी अमावस्या समाप्त हो चुकी है. इसलिए अब गणपति की मूर्ति खरीदने या घर लाने को लेकर संशय रखने की जरूरत नहीं है. बप्पा को आज घर लाया जा सकता है, लेकिन उनकी विधिवत स्थापना 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन स्थानीय मुहूर्त और पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें.

याद रखें, बप्पा के स्वागत में तारीख से अधिक जरूरी है श्रद्धा और व्यवस्था. मूर्ति पहले घर आ सकती है, लेकिन गणेशोत्सव की शुरुआत स्थापना के संकल्प से ही मानी जाएगी.

FAQ

क्या आज गणपति की मूर्ति घर ला सकते हैं?
हां, 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे अमावस्या समाप्त होने के बाद गणपति की मूर्ति घर लाई जा सकती है.

क्या गणेश चतुर्थी से पहले मूर्ति खरीद सकते हैं?
हां, मूर्ति पहले खरीदी और घर लाई जा सकती है. विधिवत स्थापना गणेश चतुर्थी के दिन करें.

गणपति स्थापना 2026 में कब होगी?
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को है. दिल्ली में मध्याह्न पूजा का समय सुबह 11:02 से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है.

क्या मूर्ति का चेहरा ढककर लाना जरूरी है?
यह कुछ परिवारों और क्षेत्रों की परंपरा है, लेकिन सभी के लिए अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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