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IAEA बोर्ड ने पारित किया प्रस्ताव, ईरान का जवाब- ये पक्षपात पूर्ण है


ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में राजनयिकों ने बुधवार को बताया कि यूएन की परमाणु निगरानी वाली संस्था के 35 देशों वाले बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने एक प्रस्ताव पास किया है. इसके तहत ईरान को यूएन सुरक्षा परिषद को रिपोर्ट किया गया है. इसमें बताया है कि तेहरान ने एटमिक हथियारों के प्रसार को रोकने से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों का उल्लंघन किया है. ऐसा 20 साल में पहली बार हुआ है. 

यह प्रस्ताव पिछले साल 12 जून को पास हुए एक प्रस्ताव के बाद आया है. उस दिन इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर बमबारी शुरू की थी. इसके तुरंत बाद अमेरिका ने भी ऐसा ही किया था. इसमें पाया गया था कि ईरान उन जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रहा था. उस उल्लंघन के लिए परिषद की रिपोर्ट करने के लिए एक और प्रस्ताव की जरूरत थी.  

हालांकि, माना जा रहा है कि सिक्योरिटी काउंसिल की तरफ से ईरान के खिलाफ किसी तरह की ठोस कार्रवाई करने की संभावना बिल्कुल कम है. उसके सहयोगी रूस और चीन स्थायी मेंबर्स हैं. उनके पास वीटो का अधिकार है. अगर चीन और रूस ऐसा करते हैं, तो ईरान और पश्चिमी देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ जाएगा. 

ईरान ने बताया पक्षपाती प्रस्ताव

वहीं, इस पूरे मामले पर ईरान की तरफ से कहा गया है कि IAEA BoG ने ईरान पर एक राजनीतिक प्रस्ताव बिना आम सहमति के पास किया है. यह एक खास ट्रेंड को दिखाता है. इससे पूरे प्रसार और रेधी सिस्टम के और कमजोर होने और अंतत: खत्म होने का रास्ता साफ होता है. मौजूदा हालात सिर्फ अमेरिका और इजरायल शासन की आक्रमक और आपराधिक हरकतों की वजह से बने हैं. अमेरिका का यह गलत मकसद है कि वह ईरानी राष्ट्र को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर देगा. उसके तेल को लूट लेगा. कभी पूरा नहीं होगा. अमेरिका ने अपने सभी सहयोगियों, पार्टनर और प्रॉक्सी केसाथ मिलकर 2 साल तक पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी. फिर भी वह मकसद हासिल नहीं कर सका. न कभी कर पाएगा. वे IAEA के जरिए पक्षपाती प्रस्ताव पास करके अपनी उस हार की भरपाई कभी नहीं कर पाएंगे. 

ईरान ने दे रखी चेतावनी, कहा- अगर प्रस्ताव पास हुआ…

इधर, ईरान ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि अगर प्रस्ताव पास हुआ तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा. इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी की बंद कमरे में हुई मीटिंग में राजनयिकों ने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी की तरफ से पेश प्रस्ताव को 23 वोट पक्ष में, तीन वोट विरोध में और आठ वोट बिना किसी पक्ष के (एब्सेटन) मिले हैं. उन्होंने बताया कि विरोध करने वाले देश रूस, चीन और नाइजर थे. प्रस्ताव में लिखा था कि बोर्ड के डायरेक्टर जनरल से अनुरोध करता है कि वे इस प्रस्ताव और पहले अपनाए गए प्रस्तावों की जानकारी एजेंसी के सभी सदस्यों, सुरक्षा परिषद और यूएन की जनरल असेंबली को दें. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)के नियमों में बताया गया है.

हालांकि नियमों का पालन न करने का मामला अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से पहले का है. यह उन जगह पर मिले यूरेनियम के निशानों के बारे में ईरान की तरफ से स्पष्टीकरण न दे पाने से जुड़ा है. एजेंसी ने सालों तक जांच की थी. अब IAEA को उन जगहों तक पहुंच मिलने को लेकर भी एक और गतिरोध पैदा हो गया है. इनपर इजरायल और अमेरिका ने बमबारी की थी. 





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