किसी प्रतिष्ठित संस्थान की डिग्री और दो दशक से ज्यादा का अनुभव आमतौर पर मजबूत करियर की पहचान माना जाता है. लेकिन अमेरिका में रह रहे गौतम देव की कहानी बताती है कि बदलते जॉब मार्केट में अनुभव और डिग्री के बावजूद हालात कितनी तेजी से बदल सकते हैं. IIT कानपुर से पढ़े और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले 61 वर्षीय गौतम आज स्थायी नौकरी की तलाश में हैं.
गौतम की मुश्किलों की शुरुआत सितंबर 2024 में हुई. वह डलास में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे. कंपनी ने उन्हें नौकरी जारी रखने के लिए दूसरे राज्य में शिफ्ट होने को कहा. गौतम ने स्थान बदलने के बजाय डलास में ही रहने और नई नौकरी तलाशने का फैसला किया. उन्हें उम्मीद थी कि अपने पुराने अनुभव और टेक्निकल बैकग्राउंड के दम पर कुछ ही महीनों में नया अवसर मिल जाएगा. लेकिन यह उम्मीद धीरे-धीरे लंबी बेरोजगारी में बदल गई.
नौकरी की तलाश बनी लंबी परीक्षा
गौतम ने अपने प्रोफेशनल नेटवर्क के जरिए नौकरियां तलाशनी शुरू कीं. कई जगहों पर संपर्क करने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिली. कुछ कंपनियों में भर्ती चल ही नहीं रही थी, जबकि कई कर्मचारी खुद अपनी नौकरियों को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे थे. उन्हें इंटरव्यू के मौके जरूर मिले और एक कंपनी में तो कई राउंड तक बातचीत भी हुई, लेकिन आखिरकार नौकरी का ऑफर नहीं मिल सका.
AI से जुड़े पदों की मांग
गौतम के मुताबिक उनकी उम्र और लंबे समय से नौकरी से बाहर रहना अब उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है. टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री भी तेजी से बदल रही है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े पदों की बढ़ती मांग के बीच उन्हें यह भी महसूस हुआ कि उनका अनुभव हर नई भूमिका के लिए पर्याप्त नहीं है. AI इंजीनियरिंग की कई वैकेंसी देखने के बावजूद वह खुद को उन पदों के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं मानते.
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गिग वर्क का सहारा
लगातार आवेदन करने के बावजूद जब स्थायी नौकरी नहीं मिली तो गौतम ने अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरे रास्ते तलाशे. उन्होंने कुछ समय के लिए डे ट्रेडिंग से कमाई करने की कोशिश की. शुरुआत में फायदा हुआ, लेकिन यह आय लंबे समय तक नहीं टिक सकी. इसके बाद उन्होंने Uber, DoorDash और Walmart Spark जैसे प्लेटफॉर्म पर गिग वर्क शुरू किया. हालांकि डिलीवरी से मिलने वाली आमदनी उनके खर्चों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है. वहीं हेल्थ के कारण वह हर तरह के डिलीवरी असाइनमेंट भी नहीं कर सकते.
बचत हो गई खत्म
लंबे समय तक बेरोजगार रहने का असर अब उनकी आर्थिक स्थिति पर साफ दिखाई दे रहा है. उनकी बचत खत्म हो चुकी है और रोजमर्रा के खर्चों को संभालने के लिए क्रेडिट कार्ड का कर्ज बढ़ गया है. डलास का किराया भी उनके लिए बड़ी चिंता बन गया है. सस्ता घर तलाशना चाहते हैं, लेकिन उन्हें डर है कि बिना नियमित नौकरी और आय के नया मकान मिलना मुश्किल हो सकता है.
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