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India Australia Relations: हिंद-प्रशांत में धौंस जमाएगा भारत, दिखेगी धाक, एक्सपर्ट ने समझाया पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे का मतलब


विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 8 से 10 जुलाई तक होने वाली ऑस्ट्रेलिया यात्रा भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को नई मजबूती देगी. उनका कहना है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है और दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, इस यात्रा से रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलेगा. मेलबर्न प्रवास के दौरान मोदी ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. वह गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन से मुलाकात, भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को संबोधित और भारतीय समुदाय से भी संवाद करेंगे.

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हिंद-प्रशांत सहयोग

विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देश ऐसे समय में संबंध मजबूत कर रहे हैं, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वैश्विक शक्तियों के बीच प्रभाव बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा तेज है. ‘ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट’ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और पूर्व सीनेटर लिसा सिंह ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे क्षेत्र के विकासशील देशों के लिए सुरक्षा और समृद्धि का महत्वपूर्ण संदेश है.

रक्षा और ऊर्जा

लिसा सिंह ने रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को दोनों देशों के रिश्तों का प्रमुख आधार बताया. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने अपनी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में हिंद महासागर के महत्व को स्वीकार किया है, जबकि भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया यदि यूरेनियम आपूर्ति के जरिए भारत की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों में सहयोग करता है तो यह दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा.

व्यापार की संभावनाएं

एएनयू नेशनल सिक्योरिटी कॉलेज के वरिष्ठ शोधार्थी फ्रेडरिक ग्रारे ने कहा कि पिछली यात्राओं में कई घोषणाएं हुईं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले. हालांकि उन्होंने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) को इस यात्रा की सबसे बड़ी संभावना बताया. उनके अनुसार, पिछले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और महत्वपूर्ण खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी तथा निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है.

सीईसीए पर जोर

ऑस्ट्रेलिया भारत का 14वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार 24.1 अरब अमेरिकी डॉलर रहा. विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि यह यात्रा सीईसीए पर जारी वार्ता को नई गति देगी. दोनों देश वर्ष 2022 में लागू आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के आधार पर सीईसीए को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं.

सुरक्षा साझेदारी मजबूत

मेलबर्न विश्वविद्यालय के वरिष्ठ व्याख्याता प्रदीप तनेजा ने कहा कि मोदी ऑस्ट्रेलिया की तीन आधिकारिक यात्राएं करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जो दोनों देशों के संबंधों के महत्व को दर्शाता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्ष 2009 की संयुक्त सुरक्षा सहयोग घोषणा को अद्यतन कर द्विपक्षीय सुरक्षा ढांचे में नए स्तंभ जोड़े जाएंगे.

क्वाड की भूमिका

तनेजा ने कहा कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान को आपसी सहयोग के जरिए ‘क्वाड’ को और सक्रिय बनाए रखना चाहिए क्योंकि क्षेत्र में चीन का दबाव निकट भविष्य में कम होने की संभावना नहीं है. सिडनी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर साल्वाटोर बाबोन्स और ग्रिफिथ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर इयान हॉल ने भी उम्मीद जताई कि यह यात्रा ऊर्जा, सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समन्वय को नई दिशा देगी.

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इनपुट-भाषा



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