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Iran-US Talk: नॉर्वे का भगोड़ा धोखेबाज पाकिस्तान में! जानें कौन है वह शख्स जिसले जेडी वेंस ने भी मिलाया हाथ


US Iran Talks 2.0: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ शांति बातचीत के पहले दौर के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे. उस वक्त से जुड़ी एक छोटी सी घटना ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. हाल ही में एक वीडियो सामने आया है, जिसमें अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ, वेंस को एक व्यक्ति से मिलवाते दिखे. बाद में नॉर्वे के अखबार VG ने उस व्यक्ति की पहचान उमर फारूक ज़हूर के रूप में की. यही से यह मामला चर्चा में आ गया.

उमर फारूक ज़हूर एक ऐसा नाम है जिसे अलग-अलग देशों में अलग नजर से देखा जाता है. नॉर्वे में वह एक वॉन्टेड व्यक्ति हैं जिन पर बड़े वित्तीय अपराधों के आरोप हैं, जबकि पाकिस्तान में उन्हें सम्मानित निवेशक के रूप में देखा जाता है. उमर फारूक ज़हूर का जन्म ओस्लो में हुआ था. उनके माता-पिता पाकिस्तान के सियालकोट से थे.

नॉर्वे में उमर फारुक खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई 2003 में हुई थी, जब एक अदालत ने उन्हें अपने ही परिवार की ट्रैवल एजेंसी से पैसे के गबन के मामले में एक साल की सजा सुनाई थी. लेकिन वह सजा सुनाए जाने के समय कोर्ट में पेश नहीं हुए और देश छोड़कर चले गए.

नॉर्वे सरकार का आरोप

साल 2010 से नॉर्वे की पुलिस उमर फारूक ज़हूर को एक बड़े बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग केस में तलाश रही है. आरोप है कि नॉर्डिया बैंक से जुड़े एक मामले में 60 मिलियन से ज्यादा नॉर्वेजियन क्रोनर की हेराफेरी हुई. नॉर्वे की एजेंसियां लगातार उनकी गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की मांग करती रही हैं, लेकिन ज़हूर इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.

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स्विट्जरलैंड और अन्य देशों में जांच

ज़हूर का नाम सिर्फ नॉर्वे तक सीमित नहीं रहा. स्विट्जरलैंड में भी उनके खिलाफ जांच हुई थी. 2004 में उन पर एक नकली बैंक के जरिए निवेशकों से लगभग 20 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी के आरोप लगे. हालांकि इस मामले में उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और बाद में केस समय सीमा खत्म होने के कारण बंद हो गया. इसके अलावा 2015 में घाना के साथ एक बड़े पावर प्रोजेक्ट डील में भी उनका नाम सामने आया. हालांकि इसमें उनकी सीधी भूमिका कितनी थी, यह साफ नहीं हो पाया और इस मामले में भी कोई सजा नहीं हुई.

पाकिस्तान में अलग छवि

यूरोप में लगे आरोपों के बावजूद पाकिस्तान में ज़हूर की छवि बिल्कुल अलग है. यहां उन्हें एक सफल बिजनेस मैन और निवेश लाने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जाता है. उन्हें देश में विदेशी निवेश लाने का श्रेय दिया गया है. मार्च 2025 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने उन्हें देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान ‘हिलाल-ए-इम्तियाज़’ दिया. यह सम्मान उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, लॉजिस्टिक्स और एनर्जी सेक्टर में लगभग 700 मिलियन डॉलर के निवेश को आसान बनाने के लिए दिया गया.

इमरान खान केस से जुड़ाव

ज़हूर का नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जुड़े तोशाखाना मामले में भी सामने आया. रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने इस केस में व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाई थी. इसी मामले में आरोप था कि इमरान खान ने सरकारी तोहफे बेचे थे. ज़हूर ने दावा किया था कि उन्होंने एक महंगी घड़ी करीब 2 मिलियन डॉलर में खरीदी थी.

इंटरपोल और कानूनी स्थिति

एक समय पर ज़हूर के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी हुआ था, जो पाकिस्तान में दर्ज एक केस से जुड़ा था. लेकिन 2022 में यह नोटिस वापस ले लिया गया, क्योंकि पाकिस्तान ने अपनी मांग वापस ले ली थी और जांच में पर्याप्त सबूत नहीं मिले. पाकिस्तान की अदालतों में भी उन्हें कुछ मामलों में राहत मिली है. 2025 में एक कोर्ट ने नॉर्वे के एक मीडिया आउटलेट के खिलाफ मानहानि केस में ज़हूर के पक्ष में फैसला दिया.

इस्लामाबाद में मौजूदगी पर सवाल

इन सब घटनाओं के बीच, 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और दूत स्टीव विटकॉफ के साथ ज़हूर का दिखना कई सवाल खड़े करता है. यह साफ नहीं है कि वह किसी आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे या निजी तौर पर वहां मौजूद थे, लेकिन यह बात साफ है कि एक ऐसा व्यक्ति, जिसे एक देश में वॉन्टेड माना जाता है, दूसरे देश में सम्मानित है और अंतरराष्ट्रीय नेताओं के करीब नजर आता है.

उमर फारूक ज़हूर की कहानी

उमर फारूक ज़हूर की कहानी एक ही व्यक्ति की दो अलग पहचान दिखाती है. नॉर्वे में वह एक बड़े आर्थिक अपराध से जुड़ा आरोपी है, जबकि पाकिस्तान में वह एक सम्मानित निवेशक और प्रभावशाली शख्सियत है. यही विरोधाभास इस पूरे मामले को और ज्यादा दिलचस्प और जटिल बनाता है.

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