Headlines

Live: SIR पर SC में सुनवाई, याचिकाकर्ता ने EC के हलफनामे का जवाब देने के लिए समय मांगा


मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और एसआईआर के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिकाओं में चुनाव आयोग की बैठकों से जुड़े रिकॉर्ड कोर्ट में तलब करने की मांग की गई है. पूरे मामले की न्यायिक जांच के अलावा फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त को काम से अलग रहने का निर्देश देने की भी मांग भी की गई है. 

जिन याचिकाओं पर सुनवाई होनी है उसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी और असदुद्दीन ओवैसी समेत दूसरे 13 विपक्षी नेताओं की याचिकाएं शामिल हैं. इनमें देश भर में चल रहे SIR को तुरंत रोकने की मांग की गई है. इससे पहले CEC ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया.

13 नेताओं की अर्जी
सुप्रीम कोर्ट में इंडिया गठबंधन के 13 नेताओं ने अर्जी दी है. इनमें राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे, टीएमसी के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, आरजेडी के तेजस्वी यादव, शिवसेना यूबीटी के संजय राउत, सीपीआई (एम) के एमए बेबी, सीपीआई के डी राजा, जेएमएम के महुआ माजी, एनसीपी एसपी के सुप्रिया सुले, आईयूएमएल के ईटी मुहम्मद बशीर, वीसीके टी थिरुमवालावन और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू शामिल हैं. 

विपक्ष की क्या मांगे हैं?
SIR पर रोक लगाने, चुनाव आयोग की बैठकों के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, चुनाव आयोग के फैसलों की कानूनी जांच, वोटर का नाम न हटाने, जो नाम हटाए गए हैं उनका ब्योरा जारी करने, वोट डेटा का ऑडिट कराने और केस के निपटारे तक मुख्य चुनाव आयुक्त के काम पर रोक लगाने की मांग की गई है.

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि पूरी याचिका सिर्फ एक न्यूज रिपोर्ट के आधार पर दाखिल की गई है. चुनाव आयोग ने कहा कि SIR के सभी आदेश सर्वसम्मति से पारित किए गए थे. फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया. ERO यानी ELECTROL REGISTRATION OFFICER के आदेश के बिना न किसी वोटर का नाम जोड़ा जाता है और न हटाया जाता है.

चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव आयोग का कोई अधिकारी अपने निर्धारित अधिकारों से बाहर जाकर आदेश जारी नहीं करता है. किसी फाइल पर की गई टिप्पणी या सुझाव आयोग का अंतिम फैसला नहीं है. जिन मतदाताओं के नाम SIR लिस्ट में नहीं जुड़ पाए..बूथ लेवल ऑफिसर उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे. CEC के काम पर रोक लगाने की मांग सुनवाई योग्य नहीं है.

चुनाव आयोग की तरफ से जो हलफनामा दायर किया गया है वो आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति से किया गया है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *