महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. मराठा आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल ने राज्य सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए 30 मई से जालना के अंतरवाली सराटी में फिर से आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान कर दिया है. जरांगे के इस कड़े रुख के बाद राज्य सरकार अलर्ट मोड पर आ गई है और उन्हें मनाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं.
मनोज जरांगे ने साफ कर दिया है कि अब सरकार को किसी भी तरह का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने हैदराबाद गजेटियर का सरकारी संकल्प (GR) तो जारी कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद लाखों मराठाओं को अब तक कुणबी प्रमाणपत्र नहीं मिल सका है. उन्होंने मांग की है कि 58 लाख मराठाओं को तुरंत कुणबी प्रमाणपत्र जारी किए जाएं. जरांगे ने दावा किया है कि इस बार के आंदोलन में महाराष्ट्र भर से करोड़ों मराठा समाज के लोग शामिल होंगे.
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मनोज जरांगे की 10 प्रमुख मांगें
अपने आगामी अनशन से पहले जरांगे पाटिल ने सरकार के सामने 10 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
- कुणबी प्रमाणपत्र: मराठवाड़ा के सभी मराठाओं को तुरंत कुणबी प्रमाणपत्र दिया जाए.
- नया GR लागू हो: 1994 की तर्ज पर नया GR (सरकारी आदेश) लागू किया जाए.
- केस वापसी: मराठा आंदोलनकारियों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस केस वापस लिए जाएं.
- सरकारी नौकरी: आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवार वालों को सरकारी नौकरी दी जाए.
- सारथी योजनाएं: ‘सारथी’ (SARTHI) की बंद पड़ी योजनाओं को दोबारा शुरू किया जाए.
- फंड जारी हो: महामंडल की लंबित (रुकी हुई) राशि तुरंत जारी की जाए.
- प्रमाणपत्र की वैधता: दिए जा रहे कुणबी प्रमाणपत्रों की वैधता (Validity) सुनिश्चित की जाए.
- उपसमिति भंग हो: सरकार द्वारा बनाई गई मराठा उपसमिति को भंग किया जाए.
- अलग मंत्रालय: मराठा और कुणबी समाज के लिए एक अलग मंत्रालय का गठन किया जाए.
- समयवृद्धि: शिंदे समिति का समय (कार्यकाल) बढ़ाया जाए
डैमेज कंट्रोल में जुटी सरकार
जरांगे पाटिल के इस अल्टीमेटम के बाद महाराष्ट्र सरकार हरकत में आ गई है. डैमेज कंट्रोल के तहत मराठा उपसमिति के अध्यक्ष और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल तथा भाजपा नेता प्रसाद लाड को जरांगे से मुलाकात के लिए भेजा गया है. इससे पहले कुणबी प्रमाणपत्रों को लेकर सरकार ने एक अहम समीक्षा बैठक भी की है.
फडणवीस पर साधा निशाना
जरांगे ने इस दौरान उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी सीधा निशाना साधा. उन्होंने कहा, “फडणवीस साहब गरीब मराठाओं का दिल जीतिए… मराठाओं को प्रमाणपत्र से मत रोकिए.”
गौरतलब है कि इससे पहले भी जरांगे पाटिल के आंदोलनों के आगे सरकार को झुकना पड़ा है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार 30 मई से पहले जरांगे को मनाने में कामयाब हो पाती है या फिर महाराष्ट्र को एक बार फिर बड़े मराठा आंदोलन का सामना करना पड़ेगा.
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