उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने शुक्रवार (29 मई) को दावा किया कि NCP का कोई भविष्य नहीं है. उन्होंने ये भी कहा कि छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेताओं को शरद पवार से अजित पवार को अलग करने और बीजेपी के साथ गठबंधन करने पर पछतावा हो रहा होगा. जुलाई 2023 में अजित पवार के कई विधायकों के साथ तत्कालीन एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होने के बाद एनसीपी में विभाजन हो गया था. जहां अजित पवार को पार्टी का नाम और ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न मिला, वहीं शरद पवार के गुट को एनसीपी (एसपी) नाम दिया गया.
राउत ने कहा कि शरद पवार से अलग होकर ‘दूसरों द्वारा बनाई गई’ इस पार्टी का कोई भविष्य नहीं है. छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, हसन मुश्रीफ और धनंजय मुंडे जैसे नेता निश्चित रूप से पछता रहे होंगे. स्थानीय निकाय चुनावों के बारे में पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने कहा कि राज्य में विपक्षी गठबंधन उन निर्वाचन क्षेत्रों में अपनी संभावनाओं की समीक्षा कर रहा है जहां उसका मत आधार सीमित है.
‘कई स्थानीय निकायों के निर्वाचन क्षेत्रों में हमारा मत आधार सीमित’
उन्होंने कहा, ‘‘कई स्थानीय स्वशासन निकायों के निर्वाचन क्षेत्रों में हमारा मत आधार बहुत सीमित है, जो आवश्यक संख्या से कहीं कम है. इसलिए इस बात पर चर्चा हुई कि इन सीटों पर कितना ध्यान दिया जाना चाहिए. चार से पांच निर्वाचन क्षेत्रों में इस बात पर चर्चा की जा रही है कि कौन चुनाव लड़ेगा और कौन सी रणनीति अपनाई जाएगी.’’नीट-यूजी 2026 के प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर महाराष्ट्र और केंद्र में बीजेपी सरकार की आलोचना करते हुए राउत ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार किए गए लोगों के संबंध सत्तारूढ़ पार्टी और आरएसएस से हैं.
NEET पेपर लीक में शामिल लोग बीजेपी के समर्थक- राउत
उन्होंने दावा किया, ‘‘मैं यह बात बार-बार कहता रहा हूं. ये सभी लोग बीजेपी से जुड़े हुए हैं. आप किसी का भी नाम ले लीजिए, मैं आपको उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बीजेपी से जुड़ा इतिहास बता दूंगा. इसमें शामिल सभी लोग बीजेपी और आरएसएस के समर्थक या कार्यकर्ता रहे हैं.’’ राउत ने आरोप लगाया कि इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आठ प्रमुख आरोपी महाराष्ट्र के रहने वाले हैं और बीजेपी से जुड़े हुए हैं.
प्रश्नपत्र तैयार करने वाले लोग बीजेपी से जुड़े हैं- संजय राउत
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘बीजेपी कार्रवाई नहीं कर सकती क्योंकि ये लोग संघ परिवार के बहुत करीब हैं. प्रश्नपत्र तैयार करने वाले लोग बीजेपी से जुड़े हैं और वही लोग प्रश्नपत्र लीक कर रहे हैं. महाराष्ट्र में प्रश्नपत्र लीक रैकेट सक्रिय होने के कारण देश भर में महाराष्ट्र की छवि धूमिल हुई है. उन्होंने कहा कि परीक्षाओं के संचालन में सेना और अर्धसैनिक बलों को शामिल करने का सरकार का कथित कदम ‘शासन की पूर्ण विफलता’ को दर्शाता है.”
क्या सेना को बुलाकर परीक्षाओं का आयोजन कराएंगे- राउत
राउत ने कहा कि सेना को सीमाओं की रक्षा करनी चाहिए, आतंकवाद के खिलाफ अभियान चलाना चाहिए और बाढ़ तथा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता करनी चाहिए. उन्होंने पूछा, ‘‘मैंने हाल में उन सीमाओं का दौरा किया जहां सेना के जवान 20,000 फुट की ऊंचाई पर तैनात हैं. वे पाकिस्तान, भूटान और चीन के साथ सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं. क्या अब आप उन्हें सीमाओं से वापस बुलाकर परीक्षाओं का आयोजन करायेंगे?
पेपर लीक होने की घटनाओं से छात्रों में तनाव- राउत
उन्होंने उन खबरों पर भी कटाक्ष किया जिनमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व्यक्तिगत रूप से नीट परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी करेंगे और पूछा कि क्या अब वह ‘‘एक प्रधानाचार्य की तरह परीक्षा केंद्रों पर बैठेंगे?’’ राउत ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं से विद्यार्थी तनाव में हैं. उन्होंने कहा, ‘‘अवसाद के कारण कई विद्यार्थियों ने आत्महत्या कर ली है. कल मराठवाड़ा में नीट के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली. नीट परीक्षा में बैठने वाले या उसकी तैयारी कर रहे विद्यार्थी मानसिक रूप से परेशान हैं और अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं.’’
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने आगे कहा कि इस स्थिति के लिए प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पूरी तरह से जिम्मेदार हैं. पड़ोसी राज्य कर्नाटक के घटनाक्रम के बारे में बात करते हुए राउत ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए सिद्धरमैया की सराहना की. राउत ने कहा, ‘‘वरिष्ठ नेता आमतौर पर इतनी आसानी से अपने पद नहीं छोड़ते. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के आदेश का पालन किया और इस्तीफा दे दिया. मैंने भारतीय राजनीति में ऐसा बहुत कम देखा है.’’
