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NEET PG Counselling: NEET PG 2026 के टॉप उम्मीदवारों की पहली पसंद क्या रही,  कौन सा कोर्स चुन रहे छात्र?


देश के मेडिकल छात्रों के बीच पोस्ट ग्रेजुएट्स कोर्स को लेकर पसंद में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. नीट पीजी के पहले राउंड के काउंसलिंग के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनके अनुसार देश के सबसे होनहार और टॉप रैंक वाले युवा डॉक्टर के बीच अब रेडियोलॉजी के मुकाबले जनरल मेडिसिन पहली पसंद बन गया है. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी की ओर से जारी नीट पीजी 2026 काउंसलिंग राउंड 1 की फाइनल अलॉटमेंट लिस्ट के अनुसार इस साल टॉप रैंकर्स ने जनरल मेडिसिन को बड़े पैमाने पर चुना, जिससे दोनों स्पेशलिटीज के बीच का अंतर साफ तौर पर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. 

जनरल मेडिसिन ने रेडियोलॉजी को पीछे छोड़ा 

नीट पीजी 2026 के पहले राउंड के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुल 63,177 एमडी-एमएस सीटों के लिए हुई. काउंसलिंग में टॉप रैंकर्स की पहली पसंद जनरल मेडिसिन रही. इसमें टॉप 100 में से 51 उम्मीदवारों ने एमडी मेडिसिन चुना, जबकि रेडियोडायग्नोसिस चुनने वाले छात्रों की संख्या 28 रही. यानी दोनों के बीच 23 सीटों का बड़ा अंतर दर्ज किया गया, जबकि पिछले साल 2025 में अंतर कम था, जहां 46 ने मेडिसिन और 40 ने रेडियोलॉजी चुना था. वहीं अगर टॉप  501 अलॉटमेंट की बात की जाए तो अकेले 233 उम्मीदवारों ने जनरल मेडिकल कोर्स चुनाव. एमडी जनरल मेडिसिन के बाद दूसरा सबसे पसंदीदा कोर्स एमडी रेडियोडायग्नोसिस रहा, जिसके तहत 149 सीटें आलोट हुई. इन दोनों प्रमुख स्पेशलिटीt को मिलाकर टॉप 501 में से कुल 382 सीटें अलॉट हुई, जो कुल आवंटन का लगभग 76.2 प्रतिशत हिस्सा है. जनरल मेडिसिन में रेडियोलोजी के मुकाबले लगभग 1.6 गुना ज्यादा सीटें अलॉट हुई. 

सबसे ज्यादा चुने गए प्रमुख कोर्सेज 

अलॉटेड कोर्स                                          उम्मीदवारों की संख्या 

एमडी जनरल मेडिसिन                                   233 
एमडी रेडियोडायग्नोसिस- रेडियोलॉजी               149
एमडी डर्मेटोलॉजी                                          37 
एमएस जनरल सर्जरी                                     25 
एमएस ओब्स्टेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी            15 
(NBEMS) जनरल मेडिसिन                            10 
एमडी न्यूक्लियर मेडिसिन                               9
एमडी  पीडियाट्रिक्स                                      7 
एमडी ऑर्थोपेडिक                                        6
(NBEMS)  रेडियो डायग्नोसिस                        6

इनके अलावा बाकी बचे उम्मीदवार एनस्थिसियोलॉजी, ऑप्थल्माेलॉजी और दूसरे  कोर्स में बंटे हुए हैं. 

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क्यों बदल रही डॉक्टरों की पसंद?

मेडिकल शिक्षा एक्सपर्ट्स और रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी का मानना है कि युवा डॉक्टर अब पीजी कोर्स को अंतिम मंजिल नहीं मान रहे बल्कि एक लांच पैड या ट्रांजिट स्टेशन के रूप में देख रहे हैं. एमडी मेडिसिन करने के बाद छात्रों के पास कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और क्रिटिकल केयर जैसी नेरो स्पेशलिटीज में जाने के कई दरवाजे खुल जाते हैं.  यह फ्लैक्सिबिलिटी उन छात्रों को बहुत आकर्षित करती है, जो अपने करियर के शुरुआती दौर में सारे ऑप्शन खुले रखना चाहते हैं.

वही रेडियोलॉजी अपनी जगह एक लोकप्रिय विषय है, लेकिन मेडिकल इमेजिंग में एआई के तेजी से बढ़ते दखल को लेकर छात्रों के मन में फ्यूचर की असमंजस की स्थिति बनी हुई है. इसके अलावा भारी-भरकम खर्च से रेडियोलॉजी डिवाइस स्थापित करने की व्यवस्था और लंबे समय तक ऑक्यूपेशनल रेडिएशन के खतरे जैसी व्यावहारिक टेंशन भी छात्रों को प्रभावित कर रही है. इसके अलावा पूरे देश में जनरल मेडिसिन की सीटें 4000 से ज्यादा है, वहीं रेडियोलॉजी की लगभग 1200 सीटें हैं. ऐसे में छात्रों को अपनी पसंद के बेहतर और मनपसंद कॉलेज में सीट मिलने की संभावना जनरल मेडिसिन में ज्यादा होती है.

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