Gen-Z के गुस्से से बेचैन क्यों हैं राजनीतिक दल?
युवाओं की बेचैनी को केवल सोशल मीडिया अभियान से शांत नहीं किया जा सकता. परीक्षा की विश्वसनीयता, रोजगार की गुणवत्ता और संस्थागत जवाबदेही पर ठोस सुधार नहीं हुए तो इसका असर विद्यार्थियों के भविष्य से लेकर 2029 के चुनावी समीकरण तक दिखाई देगा. भारत के कोचिंग सेंटरों, विश्वविद्यालयों और भर्ती केंद्रों में सुलगती बेचैनी को…
