कई बार बहुत से माता-पिता बच्चे की गलती पर गुस्से में उसकी तुलना किसी दूसरे बच्चे से करने लगते हैं. जैसे अगर उसने परीक्षा में कम नंबर लाए हों और वहीं आपके पड़ोसी के बच्चे ने उससे अच्छे नंबर लाए हों, तो कई बार माता-पिता अपने बच्चे की तुलना दूसरे के बच्चे से करने लगते हैं. ऐसी बातें सुनकर बच्चे को लगता है कि वह बहुत बुरा है और किसी लायक नहीं है. यहीं से उसके आत्मविश्वास के कमजोर होने की शुरुआत हो जाती है.

दूसरी गलती की बात करें तो कई बार माता-पिता बच्चों की गलती पर उन्हें बहुत तेज डांट देते हैं. ऐसे में उन्हें यह समझना जरूरी है कि वे बच्चे हैं और बच्चों से अक्सर गलतियां हो जाती हैं, क्योंकि वे अभी सीख रहे होते हैं. अगर बार-बार बच्चों की गलती पर डांट पड़ती है, तो बच्चा कोई भी नई चीज आजमाने से डरने लगता है. उसे लगता है कि गलती करना बहुत बुरी बात है और ऐसा करने पर दोबारा डांट पड़ेगी, इसलिए वह कोशिश करना ही छोड़ देता है.

जब बच्चा डरा हुआ, उदास या परेशान होता है और मां-बाप कहते हैं कि “इतनी सी बात पर रोना बंद करो” या “यह कोई बड़ी बात नहीं है”, तो बच्चे को लगता है कि उसकी भावनाओं की कोई कीमत नहीं है. इससे आगे चलकर बच्चा अपनी भावनाओं और बातों को छिपाने लगता है. उसे लगता है कि उसे कोई नहीं समझेगा. इससे उसका भरोसा कमजोर होने लगता है, जो सीधे तौर पर उसके आत्मविश्वास पर असर डालता है.

कई मां-बाप बच्चे की मदद के नाम पर उसका हर काम खुद ही कर देते हैं, जैसे स्कूल बैग लगाना, कपड़े चुनना या फैसले लेना. इससे बच्चे को अपने बलबूते कुछ करने का मौका ही नहीं मिलता. जब बच्चा खुद कोई काम करके नहीं देखता, तो उसे अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना नहीं आता. धीरे-धीरे वह हर छोटी बात के लिए भी मां-बाप पर निर्भर हो जाता है.

अगर बच्चा कुछ अच्छा करे तो उसकी तारीफ जरूरी है, लेकिन कई मां-बाप सिर्फ कमियों पर ध्यान देते हैं. हालांकि मां-बाप ऐसा भी बच्चे की भलाई के लिए ही करते हैं, ताकि वह अपनी कमियों को नजरअंदाज न करे, उन पर भी ध्यान दे और आगे और सफल बने. लेकिन बच्चे को छोटी-छोटी बातों पर भी उसकी सराहना करनी चाहिए. इससे वह और अच्छा करने के लिए प्रेरित होता है. जैसे अच्छे नंबर आने पर भी यह कहना कि “अगर थोड़ी मेहनत करते तो और अच्छे नंबर आते”. ऐसी बातें बच्चे की मेहनत की कद्र नहीं करतीं. बच्चे को लगता है कि वह चाहे जितना भी अच्छा कर ले, कभी काफी नहीं होगा, जिससे उसका आत्मविश्वास टूटने लगता है.

कुछ मां-बाप बच्चे को रिश्तेदारों, दोस्तों या मेहमानों के सामने डांट देते हैं या उसकी कमजोरी सबके सामने बता देते हैं. इससे बच्चे को बहुत शर्म महसूस होती है और वह खुद को छोटा समझने लगता है. बार-बार सबके सामने शर्मिंदा होने से बच्चा लोगों के बीच बोलने और अपनी बात रखने से डरने लगता है, जिसका असर उसके आत्मविश्वास पर सीधा पड़ता है.

कई मां-बाप चाहते हैं कि बच्चा वही करे जो वे चाहते हैं, चाहे वह पढ़ाई का विषय हो या कोई शौक. बच्चे की अपनी पसंद और राय को अनदेखा कर दिया जाता है. जब बच्चे को अपनी मर्जी से कुछ चुनने का मौका नहीं मिलता, तो उसे लगता है कि उसके फैसलों की कोई अहमियत नहीं है. इससे बच्चा खुद पर भरोसा करना कम कर देता है और आत्मविश्वास से जुड़े फैसले लेने में हिचकिचाने लगता है.
Published at : 03 Aug 2026 10:10 AM (IST)
