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UP SIR में जोड़े 16.18 लाख संदिग्ध नाम? रिपोर्ट पर आया निर्वाचन अधिकारी का पहला बयान


उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का काम 10 अप्रैल 2026 को पूरा हो चुका है. हालांकि अभी आपत्तियों के निस्तारण और नए नाम जोडे़ जाने की प्रक्रिया जारी है. इस बीच मंगलवार 6 अक्टूबर को एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि 16.18 लाख मतदाताओं के नाम जोड़ गए हैं. अब इस रिपोर्ट पर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्टीकरण जारी किया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूपी में 16.18 लाख ‘रहस्यमयी’ वोटर्स जोड़े गए हैं. 

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय की ओर से एक विस्तृत बयान में दावा किया गया है कि रिपोर्ट में सभी आरोप गलत हैं. आयोग ने कहा कि यूपी में SIR पूरी पारदर्शिता के साथ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950, निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 और चुनाव आयोग के निर्देशों के तहत कराया गया है.

आयोग ने 16.18 लाख वोटरों के नाम जोड़ने के आरोप पर सफाई देते हुए कहा कि ये 16.18 लाख फॉर्म-6 थे, जिन्हें 27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 के बीच एसआईआर के दौरान बीएलओ के घर-घर जाकर किए गए सर्वे में एकत्र किया गया था. ये फॉर्म उन पात्र लोगों से लिए गए थे, जिनके नाम 27 अक्टूबर 2025 को एसआईआर शुरू होने के समय की मतदाता सूची में शामिल नहीं थे और इसलिए उनके नाम पहले से छपे एन्यूमरेशन फॉर्म में नहीं थे.

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फॉर्म 6 पर भी बोले अधिकारी

सोशल मीडिया साइट एक्स पर राज्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर के अधिकृत अकाउंट पर पोस्ट बयान में कहा गया ‘नियमों के तहत केवल वे फॉर्म-6 फॉर्म-9 में दावों की सूची में शामिल किए जाने थे, जो 6 जनवरी 2026 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद प्राप्त हुए. दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान यह सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश की वेबसाइट पर भी जारी की गई थी.’

अधिकारी ने फॉर्म-6 की स्वीकृति दर को लेकर उठाए गए सवालों को भी खारिज किया. बयान में कहा गया कि किसी निश्चित प्रतिशत में फॉर्म-6 स्वीकार करने का कोई नियम, फॉर्मूला या लॉजिक नहीं है. फॉर्म-6 को निर्धारित प्रक्रिया और भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत जांच के बाद ही स्वीकार किया जाता है.



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