Headlines

US Iran War: ईरान युद्ध का असर जापान के घरों तक, गर्मी में बिजली संकट का खतरा मंडराया, ‘पावर रिस्क’ की ओर टोक्यो


US Iran War: इस गर्मी जापान में बिजली संकट गहरा सकता है. इसकी वजह मिडिल ईस्ट में बना तनाव है. अमेरिका और ईरान के बीच बने जंग के हालात की वजह से जापान एलएनजी आपूर्ति की बाधाओं का सामना कर रहा है.  एनर्जी थिंक टैंक के एक्सपर्ट्स ने सोमवार को कहा कि अगर मिडिल ईस्ट का संकट लंबा खिंचता है. लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की खेप में रुकावट बनी रहती है, तो जापान को बिजली आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ सकता है.

रॉयटर्स के मुताबिक, जापान को यह दिक्कत ऐसे समय होगी, जब देश में एयरकंडीशनिंग की मांग बढ़ जाती है. इंस्टीट्यूट ऑफ एनर्जी इकोनॉमिक्स, जापान (IEEJ) से जुड़े एक्सपर्ट्स ताकाफुमी यानागिसावा ने कहा, मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की वजह से एलएनजी आपूर्ति बाधाओं के कारण जापान को गर्मियों में बिजली का संकट का सामना करना पड़ सकता है. 

जापान हर साल 4 मिलियन मीट्रिक टन LNG आयात करता है

जापान हर साल 4 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी आयात करता है. यह उसके कुल एलएनजी आयात का 6 प्रतिशत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से आता है. यानागिसावा ने कहा है कि 2024 में कतर और यूएई का इस जलमार्ग से गुजरने वाले जापान के LNG आयात का 4% और 2% हिस्सा था.

जापान का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता ऑस्ट्रेलिया है. वह मलेशिया, रूस, अमेरिका और अन्य देशों से भी खरीद करता है. यानागिसावा ने कहा कि कतर और UAE से मिलने वाली LNG जापान की लगभग 3.5% बिजली की आपूर्ति करती है.

गर्मियों में यह गिरावट किसी भी तरह से छोटी नहीं

उन्होंने बताया कि चूंकि यह उस चीज को प्रभावित करता है जिसे ‘पावर रिजर्व मार्जिन’ के रूप में जाना जाता है. इसलिए गर्मियों के महीनों में प्रवेश करते समय 3.5% की गिरावट किसी भी तरह से छोटी नहीं है. वहीं, 60% एलएनजी जापान बिजली में उत्पादन में लगाता है. बाकी हिस्सा गैस, और अन्य आपूर्ति के लिए है. 

एक्सपर्ट्स यानागिसावा की मानें तो यूटिलिटी कंपनियां स्पॉट मार्केट से अतिरिक्त मात्रा खरीद रही हैं. ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे आपूर्तिकर्ताओं के साथ मौजूदा अनुबंधों की ‘अपर क्वांटिटी टॉलरेंस’ (UQT) का उपयोग कर रही हैं.UQT के तहत, आपसी सहमति के अधीन, अनुबंधित मात्रा में लगभग 10% तक की वृद्धि की जा सकती है. 

इधर, कतर की एलएनजी सुविधाओं को ईरानी हमलों से नुकसान हुआ है. साथ ही इनके मरम्मत में पांच साल तक का समय लग सकता है. यानागिसावा ने कहा है कि नाकेबंदी भले ही हट जाए, लेकिन कतर से निर्यात में कमी बनी रहने की संभावना है. 

यह भी पढ़ें: UN Failure: रूस-यूक्रेन से लेकर इजरायल-ईरान तक… कब-कब बुरी तरह फेल हुआ संयुक्त राष्ट्र संघ?



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WordPress Portal Gravity Forms Multi-page Navigation Gravity Forms Nested Forms Gravity Forms – Pardot Integration | Gravity Forms – Account Engagement Integration Gravity Forms Partial Entries Addon Gravity Forms PayPal Commerce Platform AddOn Gravity Forms Paypal Payments Pro Addon Gravity Forms Paypal Payments Standard Addon Gravity Forms Pipe Add-On Gravity Forms Polls Addon Gravity Forms Populate Anything