Headlines

Xप्लेन: चीन में अस्पताल से स्कूल तक आस्था की निगरानी क्यों? धर्म को लेकर जानें कानून


क्या चीन में शी जिनपिंग की सरकार धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला कर रही है. वो लोगों के निजता का हनन कर रही है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि चीन ने चेंगदू में सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में लोगों की धार्मिक मान्यताओं की जांच-पड़ताल बढ़ा दी है. ‘द एपोक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक एक सरकारी अस्पताल में कर्मचारियों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के बारे में बताने का आदेश दिया गया और शिक्षा विभाग ने छात्रों और उनके परिवारों की धार्मिक पृष्ठभूमि की जानकारी इकट्ठा की. 

14 अगस्त को छपी यह रिपोर्ट लीक हुए अंदरूनी दस्तावेजों और उन लोगों की बातों पर आधारित है जो इन तौर-तरीकों से वाकिफ हैं और जिन्होंने बदले की कार्रवाई के डर से अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बात की.

चेंगदू के एक सरकारी अस्पताल के अंदरूनी नोटिस में कहा गया कि वह “विचारधारा, जातीयता और धर्म से जुड़े कामकाज की नियमित जांच” के तहत कर्मचारियों की धार्मिक मान्यताओं का व्यापक सर्वे कर रहा है. नोटिस में कहा गया कि इस सर्वे में स्थायी स्टाफ, कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले और अस्थायी कर्मचारी समेत सभी कर्मचारी शामिल होंगे. कर्मचारियों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी देने और कोई भी ज़रूरी जानकारी न छिपाने या न छोड़ने का निर्देश दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों की कोई धार्मिक मान्यता नहीं है, उन्हें भी “कोई धार्मिक मान्यता नहीं” के तौर पर रजिस्टर करना था. नोटिस में आगे कहा गया कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को किसी धर्म का पालन करने की इजाज़त नहीं है और जिन कर्मचारियों की धार्मिक मान्यताएं हैं, उन्हें इस बारे में बताना होगा.

चीन में कम्यूनिस्ट सरकार है लेकिन वहां धार्मिक आजादी की बात कही जाती है. इस खबर के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि चीन में धर्म को लेकर क्या कानून है. आइए इस पर विस्तार से चर्चा करते हैं.

चीन का संविधान क्या कहता है

जहां तक चीन के संविधान का सवाल है तो वो सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की आजादी देता है. चीन में कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मान सकता है. हालांकि कागजों से इतर सरकार का नियंत्रण भी है. धार्मिक गतिविधियां केवल सरकार द्वारा तय कानूनी दायरे में ही की जा सकती हैं, और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) धार्मिक संगठनों पर कड़ी नज़र रखती है.

धर्म की आज़ादी चीन के संविधान का अनुच्छेद 36 नागरिकों को देता है. इसमें कहा गया है कि हर नागरिक को किसी धर्म को मानने या न मानने का अधिकार है. किसी को भी कोई धर्म अपनाने या छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. वहीं यह अनुच्छेद कहता है कि देश में कहीं भी धार्मिक भेदभाव की सख्त मनाही है. सरकार “सामान्य धार्मिक गतिविधियों” की रक्षा करती है. वहीं इसमें कहा गया है कि धार्मिक संगठनों को विदेशी संस्थाएं नियंत्रित नहीं कर सकतीं.

चीन में केवल पांच धर्मों को आधिकारिक मान्यता प्राप्त है

चीन आधिकारिक तौर पर केवल पांच धर्मों को मान्यता देता है. ये धर्म हैं – बौद्ध धर्म, ताओवाद (दाओवाद), इस्लाम, प्रोटेस्टेंट ईसाई धर्म और कैथोलिक धर्म. इन पांच धर्मों के अलावा धार्मिक समूहों को अपना धर्म पालन करने के लिए सरकार से मंज़ूरी लेनी होती है. वरना उन्हें गैर-कानूनी माना जा सकता है.

Xप्लेन: चीन में अस्पताल से स्कूल तक आस्था की निगरानी क्यों? धर्म को लेकर जानें कानून

रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है

पूजा-स्थलों और धार्मिक संगठनों को सरकार के पास रजिस्टर कराना होता है और सरकार द्वारा मंज़ूर धार्मिक संघों के तहत काम करना होता है. अगर कोई बिना रजिस्ट्रेशन वाले चर्च, मस्जिद या मंदिर पाए जाते हैं तो उसपर कानूनी कार्रवाई हो सकती है. चीन का कानून साफ कहता है कि किसी भी धर्म का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने, सार्वजनिक व्यवस्था में खलल डालने, जन-स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने, सरकारी शिक्षा प्रणाली में दखल देने आदि के लिए नहीं किया जा सकता है. 

धर्म का “सिनीसाइज़ेशन” (चीनीकरण)

हाल की सरकारी नीति के अनुसार धर्मों को चीनी संस्कृति, समाजवादी मूल्यों और सरकार के प्रति वफादारी के अनुरूप होना चाहिए. धार्मिक संगठनों से राष्ट्रीय एकता और CCP के नेतृत्व का समर्थन करने की उम्मीद की जाती है.

प्रतिबंधित धार्मिक समूह
कुछ संगठन, जैसे फालुन गोंग, चीनी कानून के तहत “पंथ संगठनों” (cult organizations) के तौर पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित हैं. कानूनी तौर पर, चीन का संविधान धार्मिक विश्वास की आज़ादी की रक्षा करता है लेकिन असल में, धार्मिक गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण है. सरकार केवल पांच आधिकारिक धर्मों को मान्यता देती है, धार्मिक संगठनों के लिए रजिस्ट्रेशन ज़रूरी बनाती है, विदेशी दखल को रोकती है, और राष्ट्रीय कानूनों व नियमों के तहत धार्मिक गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखती है.

चीन एक ‘नास्तिक’ देश
पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना आधिकारिक तौर पर एक नास्तिक देश है, जिसे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) चलाती है. यह पार्टी अपने लगभग 10 करोड़ सदस्यों के लिए नास्तिकता को अनिवार्य बनाती है. संविधान में सामान्य धार्मिक गतिविधियों के लिए बुनियादी सुरक्षा का ज़िक्र है, लेकिन सरकार सार्वजनिक आस्था पर कड़ा नियंत्रण रखती है, बिना रजिस्ट्रेशन वाले समूहों को दबाती है और धर्म के “सिनीसाइज़ेशन” (यानी धर्म को चीनी रंग में ढालने) को लागू करती है.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *